अजय शास्त्री/ बेगूसराय। ​बिहार की राजनीति में इन दिनों गमछा संस्कृति और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सियासी पारा चरम पर है। सीएम सम्राट चौधरी के हरा गमछा को लेकर दिए गए हालिया बयान ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष इसे एनडीए की हताशा और आगामी चुनावों में अपनी हार का डर बता रहा है।

​सियासी गलियारों में गमछा पर वार-पलटवार

​बेगूसराय के मटिहानी से आरजेडी विधायक बोगो सिंह ने सम्राट चौधरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे एनडीए की अंदरूनी घबराहट करार दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शायद यह सम्राट चौधरी की जुबान फिसलने का मामला हो सकता है, लेकिन स्पष्ट किया कि रंग-बिरंगे गमछों से राजनीतिक भविष्य तय नहीं होता। बोगो सिंह के अनुसार, जनता अब महागठबंधन की ओर देख रही है और एनडीए की विदाई तय है।

​बोगो सिंह की घर वापसी की चर्चा और हकीकत

​हाल ही में आरजेडी विधायक बोगो सिंह के जेडीयू कार्यालय जाकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत से मुलाकात करने के बाद सोशल मीडिया पर उनके दल-बदल की अटकलें तेज हो गईं। इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बोगो सिंह ने कहा, मेरे खून में गद्दारी नहीं है। मैंने कभी किसी का साथ नहीं छोड़ा बल्कि लोगों ने मेरी पीठ में खंजर घोंपा है। उन्होंने अपनी निष्ठा को स्पष्ट करते हुए पार्टी बदलने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

​अपराध का तांडव और सत्ता का जीरो टॉलरेंस

​राजनीतिक बयानबाजी के बीच बिहार में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा सबसे गंभीर बना हुआ है। बोगो सिंह ने राज्य में दिनदहाड़े हो रही आपराधिक घटनाओं और बेटियों की अस्मिता पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार जीरो टॉलरेंस का दावा करती है तो अपराधियों का नेटवर्क क्यों नहीं टूट रहा? बेगूसराय की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि यदि सरकार अपराधियों को पाताल से ढूंढ निकालने की बात करती है तो अब तक मुख्य सरगना और संरक्षण देने वाले होटल मालिकों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
​अंत में बोगो सिंह ने नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को पार्टी और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर काम करना होगा। जनता केवल वादों से नहीं बल्कि धरातल पर दिख रहे सुरक्षा के माहौल से ही अपना दिल जीतेगी। बिहार की जनता अब ठोस और निर्णायक कार्रवाई चाहती है न कि केवल बयानबाजी।