पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा AI समिट के मंच से ‘हरे गमछे’ को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सीएम ने एआई कैमरों का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर सिस्टम को निर्देश दिया जाए कि “हरे गमछे वाले को खोजो”, तो वह तुरंत पहचान कर लेगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति की ओर नहीं था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे निशाने पर ले लिया है।

​तेजस्वी और रोहिणी का तीखा हमला

​नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बयान को सीएम की संकीर्ण मानसिकता और नफरत का प्रतीक करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार का खजाना खाली है, महिलाओं की किस्त और बिजली दरों जैसे असली मुद्दों पर सरकार खामोश है, ये सब अब चलने वाला नहीं है।”
​वहीं, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर 11 तीखे सवाल पूछते हुए सीएम पर सीधा हमला बोला। रोहिणी ने एफिडेविट को ‘हाफीडिविट’ बोलने जैसे तंज कसते हुए सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता, पारिवारिक पृष्ठभूमि और उन पर लगे पुराने आरोपों को लेकर घेरा। उन्होंने एक कार्टून साझा करते हुए लिखा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती।

​पप्पू यादव ने दी नसीहत

​पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी सीएम के बयान की आलोचना की। उन्होंने याद दिलाया कि सम्राट चौधरी और उनके पिता भी कभी लालू यादव के साथ थे। पप्पू यादव ने कहा, “कल कोई केसरिया तो कोई लाल या पीले रंग को लेकर सवाल उठाएगा। क्या आप पूरे देश में हरा रंग या हरे कपड़े बनाना बंद करवा देंगे? सीएम को जनता के असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”

​’राजनीतिक विरोधियों को डराने का प्रयास’

​रोहिणी आचार्य ने इसे कानून-व्यवस्था के नाम पर विपक्ष को डराने की साजिश करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री एआई के इतने बड़े समर्थक हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि “भगवा गमछा वालों के सारे गुनाह क्या माफ हैं?” रोहिणी ने स्पष्ट किया कि बिहार तानाशाही के खिलाफ खड़ा रहने वाला प्रदेश है और जनता इस तरह के विभाजनकारी रवैये का मुंहतोड़ जवाब देगी। कुल मिलाकर, इस बयान ने बिहार में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है, जहां अब विकास के बजाय प्रतीकों और रंगों पर सियासत केंद्रित हो गई है।