‌पटना। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से अंचल अधिकारियों (CO) के स्तर पर बड़े पैमाने पर तबादले और नई नियुक्तियां की हैं। इस फेरबदल में कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं कुछ को मुख्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। इस कदम के साथ ही सरकार ने सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल मुहिम भी तेज कर दी है।

​प्रशासनिक फेरबदल: नई नियुक्तियां और निर्देश

​हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार, कुमार हर्ष को समस्तीपुर का नया अंचल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि सीमा रंजन को वैशाली का CO बनाया गया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारी एक सप्ताह के भीतर अपने नए कार्यभार को संभाल लें। इसके लिए संबंधित जिलाधिकारियों (DM) को अधिकारियों को तुरंत रिलीव करने का निर्देश दिया गया है।
​दूसरी ओर, मयंक आशुतोष आनन्द (कदवा), अश्विनी कुमार (बेनीपुर) और उमा शंकर (बेतिया सदर) सहित कई अन्य अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से हटाकर फिलहाल मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है।

​सरकारी जमीन की डिजिटल मैपिंग

​प्रशासनिक बदलावों के साथ ही सरकार सरकारी जमीनों के संरक्षण को लेकर डिजिटल मोड में आ गई है। बिहार सर्वेक्षण कार्यालय की उप निदेशक मोना झा ने सभी जिलों के डीएम को सरकारी भूमि की जमाबंदियों को ऑनलाइन चिह्नित और प्रदर्शित करने का सख्त निर्देश दिया है।
​अब अंचल अधिकारी ‘बिहारभूमि पोर्टल’ के ‘e-Jamabandi’ मॉड्यूल के जरिए सरकारी जमीन का सटीक ब्योरा देख सकेंगे। इसके लिए अधिकारियों को अपनी लॉगिन आईडी से पोर्टल पर जाकर ‘Reporting’ मेनू में ‘Search Government Land’ विकल्प का चयन करना होगा। जिला, अंचल, हल्का और मौजा दर्ज करते ही उस क्षेत्र की सभी सरकारी जमीनों और उनसे जुड़ी जमाबंदियों की सूची स्क्रीन पर दिखाई देगी।

​पारदर्शिता से कम होंगे भूमि विवाद

​इस नई व्यवस्था के लागू होने से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और भू-माफियाओं के जाल पर लगाम लगना तय है। पोर्टल पर स्पष्ट डेटा उपलब्ध होने से आम जनता को धोखा देकर सरकारी जमीन बेचे जाने जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी। यह पहल न केवल प्रशासन के काम को आसान बनाएगी, बल्कि जमीन से जुड़े विवादों में भी भारी कमी लाएगी। सरकारी खतियान और पंजी के अनुसार जमीनों की ऑनलाइन जानकारी होने से आम लोग भी अब सतर्क रह सकेंगे कि कौन सी जमीन सरकार की है।