पटना। बिहार में पिछले डेढ़ महीने से जारी राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब खत्म होने के कड़गार पर है। बिहार राजस्व सेवा संघ ने रुख में नरमी लाते हुए नई सरकार के सामने सुलह का प्रस्ताव रखा है। संघ का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलता है, तो वे तुरंत काम पर लौट आएंगे।

​सुलह की ओर बढ़ते कदम

​राज्य में जमीन से जुड़े कामकाज ठप होने के कारण जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए राजस्व अधिकारियों के तेवर अब कुछ नरम पड़े हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि वे विकास कार्यों में बाधा नहीं बनना चाहते, बस 5 फरवरी को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के साथ हुए समझौते को अमली जामा पहनाया जाए।

​विवाद की मुख्य जड़

​नियमों के अनुसार, 9 साल की सेवा पूरी करने के बाद राजस्व अधिकारियों को भूमि सुधार उप-समाहर्ता (DCLR) और जिला भू-अर्जन अधिकारी के पदों पर प्रोन्नति मिलनी चाहिए। वर्तमान में इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा (BASA) के अधिकारी काबिज हैं, जिसका राजस्व सेवा के अधिकारी 9 मार्च से विरोध कर रहे हैं।

​संघ की दो प्रमुख मांगें

  • ​कैबिनेट प्रस्ताव की वापसी: उस विवादित प्रस्ताव को रद्द किया जाए जिसमें DCLR का पद प्रशासनिक सेवा के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसे वापस राजस्व सेवा के कोटे में लाया जाए।
  • ​पदों पर मूल नियुक्ति: जिला भू-अर्जन अधिकारी के पदों पर प्रशासनिक सेवा के बजाय केवल राजस्व सेवा के अधिकारियों की ही तैनाती सुनिश्चित हो।

​विभागीय स्थिति

​हड़ताल के बीच सरकार का दावा है कि स्थिति सामान्य हो रही है। विभाग के अनुसार, कुल 1100 राजस्व अधिकारियों में से 589 अधिकारी पहले ही काम पर वापस आ चुके हैं। अब देखना यह है कि नई सरकार संघ की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।