पटना। बिहार में मानसून के मद्देनजर 15 जून से 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस अवधि का उपयोग पुराने स्टॉक को निपटाने और बारिश के बाद निर्माण कार्यों में गुणवत्तापूर्ण नए बालू की आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई है।
90% पुराने स्टॉक को खपाने का लक्ष्य
विभाग का मुख्य उद्देश्य मानसून खत्म होने से पहले वर्तमान में भंडारित करीब 35 लाख क्यूबिक फीट बालू के स्टॉक में से 90% को खपाना है। इसमें से लगभग 7 लाख क्यूबिक फीट बालू दूसरे राज्यों को भेजा जाएगा। शेष पुराने स्टॉक को निजी निर्माण, नाली, गली और सड़क निर्माण कार्यों में प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग समय-समय पर समीक्षा कर बिक्री के लक्ष्यों में बदलाव कर सकेगा।
निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग
खनन गतिविधियों और भंडारण स्थलों पर पारदर्शिता लाने के लिए विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब सभी बालू घाटों और भंडारण स्थलों का जियोग्राफिक नक्शा तैयार किया जाएगा। अवैध खनन और भंडारण पर नकेल कसने के लिए इन स्थलों की निरंतर निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से की जाएगी।
गुणवत्ता और माफिया पर लगाम
यह निर्णय दो प्रमुख कारणों से लिया गया है:
- निर्माण की मजबूती: लंबे समय तक खुले में डंप रहने से बालू नमी सोख लेता है और उसमें धूल-मिट्टी मिल जाती है, जिससे सीमेंट के साथ उसकी पकड़ कमजोर हो जाती है। इसके विपरीत, नदियों से आने वाला नया बालू साफ, खुरदरा और नुकीले दानों वाला होता है, जो कंक्रीट की संरचना (छत, बीम, पिलर) को अत्यधिक मजबूती प्रदान करता है।
- माफियाओं की मनमानी: विभाग को सूचना मिली थी कि बालू माफिया कृत्रिम किल्लत पैदा कर पुराने बालू को ऊंची कीमतों पर बेचते हैं। नई व्यवस्था के तहत, बारिश के बाद सीधे नए बालू की निर्बाध आपूर्ति शुरू होने से इन अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
नया बालू क्यों है बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार, नया बालू गुणवत्ता में श्रेष्ठ होता है। इसमें अशुद्धियां 5% से कम होती हैं। इसकी पहचान यह है कि मुट्ठी में दबाने पर यह आसानी से फिसल जाता है, जबकि पुराना या घटिया बालू नमी के कारण जम जाता है। बारिश के बाद, राज्य में सरकारी निर्माण कार्यों के लिए पूरी तरह से ताजे बालू का उपयोग अनिवार्य होगा, जिससे राज्य की आधारभूत संरचना को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

