कुंदन कुमार/पटना। बिहार में बाल श्रम जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अपने प्रयासों को और अधिक गति प्रदान की है। इसी क्रम में, बुधवार को राजधानी पटना में ‘बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग’ के नवीकृत कार्यालय का भव्य उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद उपस्थित रहे।
आयोग की कार्यप्रणाली और सरकारी संकल्प
कार्यालय का फीता काटने के बाद, मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने आयोग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने आयोग की वर्तमान कार्यप्रणाली, बाल श्रमिकों के संरक्षण, उनके पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बाल श्रम के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपना रही है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा राज्य सरकार द्वारा निरंतर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों और प्रशासनिक सख्ती का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बाल श्रम के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, जो हमारे सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।
मिशन मोड: पंचायत स्तर पर ‘बाल श्रम मुक्त’ बनाने का लक्ष्य
इस अवसर पर मंत्री ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय की घोषणा की। उन्होंने बताया कि बाल श्रम के खिलाफ चल रहे अभियान को और अधिक प्रभावी और जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सरकार ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत आगामी तीन महीनों के भीतर राज्य के प्रत्येक प्रखंड की तीन-तीन पंचायतों को चिह्नित कर उन्हें ‘बाल श्रम मुक्त पंचायत’ के रूप में घोषित किया जाएगा। इस नई पहल की रूपरेखा और औपचारिक शुरुआत की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
सामाजिक सहभागिता की अपील
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से समाज की इस गहरी समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता और जन-जागरूकता इस मुहिम की रीढ़ है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आने वाले समय में बिहार बाल श्रम जैसी सामाजिक बाधाओं को पीछे छोड़कर एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होगा।

