भोजपुर। भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर के खिलाफ आयोजित महापंचायत ने जनसैलाब का रूप ले लिया है। इस महापंचायत में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सरकार और प्रशासन पर तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार संविधान से चलेगा, किसी व्यक्ति विशेष (सम्राट चौधरी) की इच्छा से नहीं।
न्याय के लिए लामबंद हुआ बिलौटी गांव
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही आक्रोशित ग्रामीणों ने उनके घर से लेकर हाईवे तक पोस्टर लगाकर उन्हें शहीद का दर्जा दिया है। महापंचायत में 5,000 से अधिक लोगों की भीड़ और करीब 1,000 गाड़ियों का पहुंचना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। भीड़ ने ‘भरत तिवारी अमर रहे’ के नारों के साथ स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।



प्रशांत किशोर का कड़ा रुख: होगी हर स्तर पर जांच
महापंचायत को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने घोषणा की कि इस मामले में गृह मंत्री से लेकर एसटीएफ के उन अधिकारियों तक की भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिन्होंने पटना से आदेश दिए। उन्होंने सवाल उठाया क्या उस मजिस्ट्रेट की जवाबदेही तय होगी जिसने गोली चलाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए?
कानूनी कार्रवाई और सरकारी कदम
उल्लेखनीय है कि 17 जून को हुए इस एनकाउंटर को परिजनों ने फर्जी करार दिया था। मां की शिकायत पर जगदीशपुर के एसडीपीओ, एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। सरकारी कार्रवाई के तहत, बुधवार को जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा शेष है।
महापंचायत की प्रमुख मांगें
- सख्त कानूनी कार्रवाई: एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर हत्या का मुकदमा चले।
- गांव का विकास: भरत तिवारी जिन जनहित कार्यों के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
- आर्थिक सहयोग: पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले।
- आंदोलन का विस्तार: दिल्ली और अन्य राज्यों से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जाएगा।
भरत के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि उनके भाई का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और वे जनता के उन अधूरे कार्यों को पूरा करने की मांग करते हैं जिनके लिए भरत ने आवाज उठाई थी।

