बिहार सरकार द्वारा शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE-4) का विज्ञापन जारी किए जाने के बावजूद पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज बना हुआ है। अभ्यर्थी परीक्षा के पैटर्न में किए गए बदलावों और अन्य मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। आंदोलन की शुरुआत प्रतिदिन रघुपति राघव राजा राम, राष्ट्रीय गान और वंदे मातरम के गान के साथ हो रही है।
छात्रों की प्रमुख मांगें और विरोध के कारण
छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में सैंकड़ो अभ्यर्थी दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध दो चरणों यानी प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा के पैटर्न और निगेटिव मार्किंग को लेकर है।
- एकल परीक्षा की मांग: छात्रों का कहना है कि TRE-1, 2 और 3 की तरह TRE-4 में भी केवल एक ही परीक्षा ली जाए।
- नए बदलावों पर आपत्ति: अभ्यर्थियों की दलील है कि सरकार को कोई भी नया प्रयोग या बदलाव TRE-5 से करना चाहिए, क्योंकि पीटी और मेंस के चक्कर में इस प्रक्रिया में कई साल बर्बाद हो जाएंगे।
- डोमिसाइल नीति: छात्रों द्वारा TRE-4 में डोमिसाइल पॉलिसी लागू करने की भी मांग की जा रही है।
सरकार और राजभवन का रुख
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि सभी मांगों को पूरा करना संभव नहीं है। यह नियम सामान्य प्रशासन विभाग और बीपीएससी द्वारा मिलकर तय किया गया है ताकि उच्च प्रतिभा वाले शिक्षक मिल सकें।
दूसरी ओर, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से मुलाकात की। राज्यपाल ने छात्रों की समस्याएं गंभीरता से सुनते हुए भूख हड़ताल न करने की अपील की और सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया। इसके अलावा, बिहार स्टूडेंट यूनियन ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विज्ञापन में सुधार की मांग की है।
शिक्षकों का समर्थन और आपसी एकजुटता की अपील
प्रसिद्ध शिक्षक रौशन आनंद ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि छात्र विभिन्न गुटों में बंटे होने के बजाय एक मंच पर आएं। उन्होंने सलाह दी कि छात्रों को पूरा दिन आंदोलन में रहने की बजाय रोजाना दो-चार घंटे ही सही, अपनी भागीदारी जरूर निभानी चाहिए ताकि आंदोलन को अधिक मजबूती मिल सके।

