वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब परिवहन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। न्यायधानी बिलासपुर में कार टैक्सी संघ ने टैक्सी किराए में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। वाहन चालक मालिक सामाजिक संघ (कार टैक्सी संघ) छत्तीसगढ़ की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए किराया दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है।

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संघ की ओर से व्यापार विहार स्थित तारामंडल सभागार में जिले के ट्रेवल्स संचालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ट्रेवल्स संचालकों ने हिस्सा लिया और टैक्सी व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं, बढ़ती लागत और वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।

लोकतांत्रिक मतदान से लिया गया फैसला

बैठक में मौजूद सदस्यों ने लोकतांत्रिक मतदान प्रक्रिया के माध्यम से किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा की। इसके बाद बहुमत की सहमति से टैक्सी किराए में वृद्धि का निर्णय लिया गया। संघ का कहना है कि परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की राय लेने के बाद ही यह फैसला किया गया है।

बेस किराए में ₹200 और प्रति किलोमीटर ₹2 की बढ़ोतरी

बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार टैक्सी के बेस किराए में ₹200 की वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा प्रति किलोमीटर किराए में भी ₹2 की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है। संघ का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, वाहन रखरखाव, ऑटो पार्ट्स, बीमा, चार्जिंग और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण पुराने किराए पर व्यवसाय संचालित करना मुश्किल हो रहा था।

ऑनलाइन कंपनियों पर लगाए शोषण के आरोप

बैठक के दौरान टैक्सी संचालकों ने ऑनलाइन कैब सेवा देने वाली कंपनियों पर भी निशाना साधा। संघ ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टैक्सी मालिकों और चालकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। सदस्यों ने ऐसी कंपनियों की नीतियों का विरोध करते हुए स्थानीय परिवहन व्यवसाय को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

परिवहन व्यवसाय को बचाने के लिए जरूरी कदम: संघ

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में परिवहन व्यवसाय को सुचारु रूप से संचालित रखने के लिए किराया बढ़ाना मजबूरी बन गया था। यदि समय रहते किराए में संशोधन नहीं किया जाता, तो कई छोटे संचालकों के लिए व्यवसाय चलाना कठिन हो जाता।

बैठक में मौजूद ट्रेवल्स संचालकों और अन्य सदस्यों ने संगठन के निर्णय का समर्थन करते हुए इसे वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक कदम बताया। संघ ने दावा किया कि यह फैसला पूरी तरह पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बहुमत की सहमति से लिया गया है।

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