कुंदन कुमार, पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह का एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया बयान राज्य में भारी राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है। गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने एक विवादित लोकोक्ति का इस्तेमाल किया, जिसके बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।

​विवाद की शुरुआत: ‘हाथी चले बाजार…’ वाला बयान

​पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने TRE-4 परीक्षा की रूपरेखा (दिसंबर-जनवरी में संभावित, दो चरणों में पीटी और मेंस, तथा नेगेटिव मार्किंग) की जानकारी दी। इसी दौरान जब पत्रकारों ने गर्दनीबाग में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा, “एक कहावत आपने सुना होगा, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।”
​इस अमर्यादित टिप्पणी के सामने आते ही छात्र भड़क उठे और आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।

​छात्रों का तीखा आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी

​परीक्षा नियंत्रक के इस बयान से आहत छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा, “यही कुत्ता एक दिन आपके आयोग का अधिकारी बनेगा। एक बार कॉकरोच बोला गया था, तो प्रधान जी चले गए, अब सचिव की बारी है।” छात्रों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं को इस तरह के अपशब्द कहना प्रशासनिक अहंकार को दर्शाता है।
​विवाद बढ़ता देख परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात पर माफी मांग ली और स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। हालांकि, छात्र इस माफी से संतुष्ट नहीं हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार और सौरभ कुमार ने डीएम कुंदन कुमार और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के साथ बैठक की, जो बेनतीजा रही। इसके बाद छात्रों ने ऐलान किया है कि मंगलवार सुबह 10 बजे गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए विशाल मार्च निकाला जाएगा।

​रोहिणी आचार्य का तीखा तंज

​राजद नेत्री रोहिणी आचार्य ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि छात्रों को ‘कुत्ता’ कहने वाले अधिकारी पर उचित और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनसेवक की भूमिका निभा रहे अधिकारियों द्वारा युवाओं और छात्रों के प्रति ऐसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक है, जो प्रशासनिक गरिमा का खुला उल्लंघन है।