अनुज पांडेय, गोपालगंज। जिले में पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) विनय तिवारी की जीरो टॉलरेंस नीति का असर लगातार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में, पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर अवैध रूप से तीन हजार रुपये की रिश्वत मांगने और आवेदक का आवेदन गलत तरीके से खारिज करने का मामला सामने आने पर एसपी ने भोरे थाना के अपर थानाध्यक्ष संदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

​क्या था पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, भोरे थाना क्षेत्र के एक स्थानीय नागरिक ने पासपोर्ट सत्यापन के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपर थानाध्यक्ष संदीप कुमार ने आवेदक से तीन हजार रुपये रिश्वत की मांग की। जब पीड़ित आवेदक ने रिश्वत देने से साफ इंकार कर दिया, तो आक्रोशित होकर आरोपी अधिकारी ने नियम-विरुद्ध तरीके से और दुर्भावनापूर्ण नीयत से उसके पासपोर्ट आवेदन को रिजेक्ट कर दिया।

​जांच में आरोप सही साबित

​पीड़ित ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधे पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को समझते हुए एसपी ने उच्च अधिकारियों से इसकी गोपनीय और निष्पक्ष जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में अपर थानाध्यक्ष द्वारा रिश्वत मांगने और बिना किसी ठोस कारण के पासपोर्ट आवेदन निरस्त करने के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। रिपोर्ट सामने आते ही एसपी ने बिना देर किए आरोपी पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया।

​जनता में बढ़ा विश्वास और एसपी की दो टूक चेतावनी

​एसपी की इस कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई से आम जनता के बीच पुलिस के प्रति भरोसा काफी मजबूत हुआ है। अब जिले के नागरिक बिना किसी डर के अपनी शिकायतें सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं। जादोपुर थाने में हुई पूर्व की सख्त कार्रवाइयों का हवाला देते हुए एसपी ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी की आड़ में भ्रष्टाचार या आम जनता का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।