गुलशन कुमार, नांगल चौधरी। महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी में इन दिनों सार्वजनिक जगहों पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों को लेकर अचानक एक चर्चा तेज हो गई कि इनका पूरा कंट्रोल किसी निजी व्यक्ति के पास है। इस बात को लेकर लोगों में तरह-तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं। जब इस मामले की जमीनी पड़ताल की गई, तो असल सच्चाई कुछ और ही निकलकर सामने आई। इलाके में करीब 60 से 70 कैमरे लगाए जाने हैं, जिनमें से 40 कैमरे लगाने का काम पूरा हो चुका है।
जांच और टेस्टिंग के लिए मिला है अस्थायी कंट्रोल
सीसीटीवी कैमरों को लेकर उठ रहे सवालों पर नांगल चौधरी के थाना प्रभारी पवन कुमार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि किसी भी निजी व्यक्ति के पास इन कैमरों का स्थायी कंट्रोल होने की बात बिल्कुल गलत है। थाना प्रभारी के मुताबिक, अभी कैमरे लगाने का काम चल रहा है। केवल तकनीकी वजहों से कैमरे लगाने वाली कंपनी के पास इसका अस्थायी कंट्रोल है, ताकि वे कैमरों की सेटिंग और जांच का काम पूरा कर सकें। काम पूरा होते ही इसका पूरा कंट्रोल नांगल चौधरी थाने के पास आ जाएगा।
समाजसेवी के सहयोग से चल रहा है काम
कैमरे लगाने वाली कंपनी के प्रतिनिधि ने भी साफ किया कि यह पूरा काम समाजसेवी सुधीर चौधरी के सहयोग से किया जा रहा है। जैसे ही कैमरों को लगाने और सेट करने का काम खत्म होगा, इसका पूरा सिस्टम पुलिस को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति के पास इन कैमरों को देखने का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
अफवाहों से समाजसेवियों का टूटता है हौसला
इस पहल को लेकर जब स्थानीय लोगों से बातचीत की गई, तो उन्होंने इस काम की काफी तारीफ की। लोगों का कहना है कि नांगल चौधरी हमेशा से समाजसेवा के कामों में आगे रहा है। पहले भी यहां पानी की किल्लत को दूर करने के लिए समाजसेवियों ने बड़ा योगदान दिया था। अब सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुधीर चौधरी आगे आए हैं। नागरिकों का मानना है कि इन कैमरों से अपराधों पर रोक लगेगी और पुलिस को भी जांच में मदद मिलेगी। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बिना पूरी सच्चाई जाने किसी अच्छे काम पर उंगली उठाना ठीक नहीं है, इससे समाज का भला करने वालों का हौसला टूटता है।
शंकाओं को दूर करना बेहद जरूरी
अब सबसे बड़ी बात यह है कि इन कैमरों को लगाने का काम कब तक पूरा होता है और इसका आधिकारिक कंट्रोल पुलिस को कब सौंपा जाता है। इसके साथ ही इस बात की जांच भी होनी चाहिए कि आखिर कैमरों के निजी कंट्रोल में होने की अफवाह किसने और किस इरादे से फैलाई, ताकि आम जनता के बीच की हर शंका पूरी तरह दूर हो सके।

