सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। जिले से एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां NCL जयंत परियोजना और उसके अंतर्गत काम करने वाली चड्ढा कंपनी पर एक गरीब परिवार का आशियाना उजाड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता महिला ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या मुआवजे के उसके दो कमरों के मकान को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।

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बिना अग्रिम सूचना और मुआवजे के ढहा दिया मकान

जनसुनवाई में पहुंची पीड़ित महिला नीता देवी ने बिलखते हुए आपबीती सुनाई। पीड़िता के अनुसार जिस जमीन पर उनका मकान बना था वह आधिकारिक तौर पर उनके पति के नाम पर दर्ज है और वे लोग वर्षों से वहां रह रहे हैं। उनके पास जमीन के सीमांकन सहित सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज भी मौजूद हैं।

इसके बावजूद कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी अचानक भारी अमले के साथ मौके पर पहुंचे और मकान को तोड़ना शुरू कर दिया। महिला का आरोप है कि जब उसने इस कार्रवाई का विरोध करने की कोशिश की तो कंपनी के लोगों ने उन्हें जबरन रोक दिया और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए वहां से खदेड़ दिया।

शहर में चला बुलडोजर और ‘साहब’ को भनक तक नहीं!

इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब इस बिना नोटिस की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर शहरी एसडीएम सुरेश जाधव से बात की गई तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था।

एसडीएम ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि एनसीएल प्रबंधन अपने स्तर पर कार्रवाई करता है, हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अगर हमारे पास लिखित शिकायत आती है तो हम मामले की जांच करवाएंगे।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे बड़े सवाल

एसडीएम के इस बयान के बाद कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। बड़ा सवाल यह है कि शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में कोई भी निजी कंपनी या प्रबंधन बिना स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी के किसी के घर पर बुलडोजर कैसे चला सकता है? अगर बुलडोजर चला तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

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फिलहाल पीड़िता ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी कंपनी प्रबंधन पर कार्रवाई करने और उचित मुआवजा दिलाकर न्याय देने की मांग की है।

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