रमेश सिन्हा, पिथौरा। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के स्वास्थ्य विभाग में छोटे बच्चों को दी जाने वाली रोटावायरस वैक्सीन की लंबे समय से कमी बनी हुई है, जो कि अब चिंता का विषय बन गई है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में यह महत्वपूर्ण वैक्सीन दो से तीन महीनों से उपलब्ध नहीं है, जबकि राज्य से आपूर्ति रुकने के कारण स्टॉक खाली पड़ा है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने क्या कहा ?
पिथौरा स्वास्थ्य विभाग में साल भर में लगभग 3700 डोज रोटावायरस ड्रॉप की खपत होती है। पूरे महासमुंद जिले में प्रति वर्ष करीब 15,000 डोज की जरूरत बताई जा रही है। यह वैक्सीन सरकारी आपूर्ति पर आधारित है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी नागेश्वर राव ने स्पष्ट कहा है हमारे यहां दो महीनों से स्टॉक नहीं है। यह सप्लाई सीधे राज्य से होती है।
रोटावायरस वैक्सीन क्या है ?
रोटावायरस वैक्सीन शिशुओं को डेढ़ माह दो माह और साढ़े तीन माह की उम्र में तीन बार मुंह से ड्रॉप्स के रूप में दी जाती है। यह वैक्सीन बच्चों को गंभीर दस्त डायरिया, उल्टी और पेट के खतरनाक संक्रमण से बचाती है। इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी डिहाइड्रेशन रुकती है और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत काफी कम हो जाती है। यह इंजेक्शन की जगह आसानी से पिलाई जाने वाली ड्रॉप्स है और शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।
कमी के नुकसान
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन न मिलने से कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। जानकारी रखने वाले माता-पिता निजी अस्पतालों या क्लिनिक में वैक्सीन लगवा रहे हैं, लेकिन जिन परिवारों को जानकारी नहीं है या आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके बच्चों को यह सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गंभीर डायरिया के मामलों में वृद्धि हो सकती है। बच्चों को बार-बार अस्पताल जाना पड़ सकता है और डिहाइड्रेशन जैसी जानलेवा स्थिति का खतरा बढ़ सकता है। छोटे बच्चों में रोटावायरस संक्रमण तेजी से फैलता है और बिना टीके के जोखिम कहीं अधिक होता है।
निजी अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन सरकारी व्यवस्था पर निर्भर गरीब और ग्रामीण परिवार इससे वंचित रह रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की आपूर्ति व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है। साल भर की जरूरत 15,000 डोज के आसपास होने के बावजूद महीनों से स्टॉक न होना छोटे बच्चों के स्वास्थ्य अधिकार पर सवाल खड़ा करता है।
वैक्सीन क्यों जरूरी है ?
- गंभीर दस्त और उल्टी से बचाव
- डिहाइड्रेशन रोकना
- अस्पताल में भर्ती और खर्च कम करना
- आसान खुराक (मुंह से ड्रॉप्स)
- सुरक्षित और प्रभावी सुरक्षा
स्वास्थ्य के जानकारों ने क्या कहा
शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि जिले के सभी छोटे बच्चों को समय पर यह महत्वपूर्ण वैक्सीन मिल सके। माता-पिता से भी अनुरोध है कि वे अपने बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम नियमित रखें और कमी की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या निजी सुविधा से सलाह लें। यह कमी सिर्फ एक वैक्सीन की कमी नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। समय रहते समाधान न निकला तो नुकसान का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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