TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही एफआईआर को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने तीन एफआईआर रद्द करते हुए कहा कि भविष्य में नई FIR दर्ज करने से पहले उसकी अनुमति अनिवार्य हो सकती है. इस दौरान कोर्ट ने सुनवाई के समय टिप्पणी करते हुए कहा कि “बस बहुत हो गया, मैं 4 मई से यही सुनता आ रहा हूं.”

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने टीएमसी नेता के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा कई एफआईआर दर्ज किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोर्ट की मंजूरी के बिना और एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने का आदेश दे सकता है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा ‘बस बहुत हो गया, मैं 4 मई से यही सुनता आ रहा हूं. अब मैं उसी आदेश के आधार पर आदेश देने जा रहा हूं.

सोमवार, 7 सितंबर 2026 को कोर्ट कहा कि अब बहुत हो गया. कोर्ट ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत पर्सनली तीन शिकायतें देखी हैं, जिनमें किसी का भी याचिकाकर्ता से कोई संबंध नहीं है. अदालत ने आगे टिप्पणी की कि हालांकि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन इस स्तर पर बनर्जी से हिरासत में पूछताछ करना उचित नहीं है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 30 नवंबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया. कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था जो क्लिनिकल प्रैक्टिस और नकली दवाओं से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायत पर दर्ज FIR से संबंधित थी.

कोर्ट ने कहा कि जांच के बिना यह कैसे माना जा सकता है कि आरोपों का अभिषेक बनर्जी से कोई संबंध है. अभिषेक बनर्जी की तरफ से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए. सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने शिकायत की प्रकृति पर असंतोष जाहिर किया .

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