भारत विरोधियों गतिविधियों में शामिल खालिस्तानी अब कनाडा के लिए भी परेशानी का सबब बन रहे हैं. कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने इसे लेकर चेतावनी दी है. एजेंसी ने कहा कि कुछ व्यक्ति हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं. वे चरमपंथ से जुड़े ऑपरेशनों का समर्थन करने के लिए कनाडा को बेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. एजेंसी ने कहा कि यह समूह अपने हिंसक चरमपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए देश की संस्थाओं का गलत इस्तेमाल करता है.

CSIS ने कहा कि कनाडा को चरमपंथी खतरों और विदेशी हस्तक्षेप दोनों से निपटने में सतर्क रहना चाहिए, जबकि कानूनी राजनीतिक गतिविधियों की रक्षा करना जारी रखना चाहिए.

खालिस्तानी चरमपंथियों के लिए अब कनाडा सुरक्षित स्थान नहीं रहा है. कनाडा के एजेंसियों भी खालिस्तानियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा मान रही हैं. कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है.

कनाडा की सुरक्षा एजेंसी CSIS ने खालिस्तानी चरमपंथियों को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है. अपनी 2025 की रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि ये समूह हिंसक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए कनाडाई संस्थानों का दुरुपयोग करते हैं.

खालिस्तानी आतंकवादियों की एक छोटी संख्या कनाडा और विदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है. साल 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी किया गया है, जिसमें खालिस्तानियों को लेकर चेतावनी जारी कर रही है.

शुक्रवार को कनाडा सरकार की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट में कहा गया, “कुछ CBKEs के कनाडा के नागरिकों से अच्छे संबंध हैं. ये लोग कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल अपने हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने और समुदाय के ऐसे सदस्यों से चंदा इकट्ठा करने के लिए करते हैं जिन्हें इसकी भनक भी नहीं होती. बाद में इस पैसे का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है.”

खालिस्तानी चरमपंथी समूह भारत के भीतर एक संप्रभु राज्य बनाने की मांग करते हैं. अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होने के कारण नई दिल्ली ने इन्हें आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खालिस्तान राज्य बनाने के लिए अहिंसक तरीके से की जाने वाली वकालत को चरमपंथ नहीं माना जाता. कुछ कनाडाई नागरिक खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन का समर्थन करने के लिए वैध और शांतिपूर्ण अभियानों में हिस्सा लेते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है, “सिर्फ व्यक्तियों का एक छोटा सा समूह ही खालिस्तानी चरमपंथी माना जाता है. ये लोग कनाडा को एक आधार (बेस) के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, उसके लिए चंदा इकट्ठा करने या उसकी योजना बनाने का काम करते हैं.”

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m