ईरान द्वारा अमेरिका को भेजे गए नए 14-सूत्रीय प्रस्ताव में, इस्लामी राष्ट्र ने वाशिंगटन के साथ मुद्दों को 30 दिनों के भीतर हल करने और युद्धविराम को बढ़ाने के बजाय 65 दिनों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया है, जैसा कि ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया है। अमेरिका ने इस पर असंतोष जताया है, जबकि ईरान 30 दिनों के भीतर स्थायी समाधान चाहता है और परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद बरकरार हैं।

ईरान ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए अमेरिका को 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है।

पश्चिम एशिया में तनाव घटाने और बेहद अहम रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रयासों के तहत ईरान ने अमेरिका को 14 सूत्रीय जवाबी शांति प्रस्ताव भेजकर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से वाशिंगटन तक पहुंचाया गया है, जिसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात कही गई है। अमेरिका जहां दो महीने के युद्धविराम की वकालत कर रहा है, वहीं ईरान ने स्पष्ट किया है कि समाधान 30 दिनों के भीतर होना चाहिए।

यह प्रस्ताव अमेरिका की नौ सूत्री योजना का खंडन है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने पहले ही कहा था कि वह प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर संदेह व्यक्त किया कि इससे कोई समझौता हो पाएगा। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा, “उन्होंने पिछले 47 वर्षों में, इस्लामी क्रांति के बाद से, मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”

ट्रंप ने चेताया कि अगर ईरान दु‌र्व्यवहार करता है तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है और सैन्य विकल्प अभी भी खुले हैं। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम डगमगा रहा है. एएनआइ के अनुसार, अमेरिका की नौ सूत्रीय योजना के जवाब में ईरान ने कई अहम मांगें रखी हैं- जैसे सैन्य हमले की गारंटी खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और आर्थिक प्रतिबंध हटाना।

साथ ही होर्मुज में आवाजाही के लिए नए तंत्र का प्रस्ताव भी दिया गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इसे स्थायी समाधान की दिशा में कदम बताते हुए कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है- कूटनीति या टकराव। वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की खुफिया इकाई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका को असंभव युद्ध और खराब समझौते में से चुनना होगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध को लेकर ओमान और इटली के अपने समकक्षों से बात की। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसाइदी ने अराघची के साथ अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की समीक्षा की।

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