सुदीप उपाध्याय, बलरामपुर। किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग की ओर से भाला-गिरवानी नहर परियोजना के तहत करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही कंक्रीट नहर पहली ही मूसलाधार बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। नहर टूटने की घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है, वह पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही बरती गई है। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण मानकों का पालन किया गया होता, तो नहर इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त नहीं होती।

विभागीय अधिकारियों से की गई थी गुणवत्ता की शिकायत

स्थानीय किसानों सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से गुणवत्ता संबंधी शिकायतें की थीं। किसानों का आरोप है कि नहर निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी तथा कंक्रीट की उचित देखरेख और पटाई भी नहीं की जा रही थी। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

निर्माण स्थल पर जिम्मेदारों के नदारद रहने का आरोप

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण स्थल पर विभाग के इंजीनियर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते थे। वहीं ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अधिकांश समय नदारद रहते थे। ऐसे में निर्माण कार्य की निगरानी प्रभावित हुई और इसका परिणाम पहली ही बारिश में नहर टूटने के रूप में सामने आया।

भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को इस परियोजना से सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, लेकिन निर्माणाधीन नहर के टूटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि अभी से गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है और करोड़ों रुपये की सरकारी राशि व्यर्थ चली जाएगी।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नहर टूटने की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि किसानों के हितों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

निर्माणाधीन थी नहर, लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई : एग्जीक्यूटिव इंजीनियर

मामले में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नारायण प्रसाद डहरिया ने बताया कि नहर में सीडी (क्रॉस ड्रेनेज) का निर्माण कराया जाना था, जिसके लिए ठेकेदार को निर्देशित भी किया गया था। इसी बीच अचानक तेज बारिश हुई, जिससे कैनाल टूट गया। वहीं उक्त कार्य में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, कार्य अभी निर्माणाधीन है, इसलिए ठेकेदार के माध्यम से पुनः क्षतिग्रस्त हुए हिस्से का निर्माण पूर्ण कराया जाएगा।

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