पटना। भारत की आगामी जनगणना 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। इस बार डिजिटल जनगणना के साथ-साथ सामाजिक बदलावों को भी सांख्यिकी डेटा में जगह दी जा रही है। सबसे प्रमुख बदलाव लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को लेकर है, जिन्हें अब जनगणना के दौरान शादीशुदा का दर्जा दिया जा सकेगा।
सामाजिक बदलाव और सांख्यिकी मान्यता
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि लिव-इन में रहने वाला जोड़ा अपने रिश्ते में स्थिरता और भविष्य की प्रतिबद्धता जताता है, तो उन्हें जनगणना में विवाहित माना जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह दर्जा केवल सांख्यिकीय डेटा के उद्देश्य से है। इसका अर्थ यह है कि इस डेटा के आधार पर किसी भी कानूनी विवाह की मान्यता या अधिकार का दावा नहीं किया जा सकेगा।
ऑनलाइन मोड और स्वगणना
इस बार जनगणना पूरी तरह ऑनलाइन होगी। 17 से 30 अप्रैल 2026 तक ‘स्वगणना’ की अवधि तय की गई है, जिसमें नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद, 1-2 मई से जनगणना कर्मी घर-घर जाकर डेटा सत्यापन और पंजीकरण करेंगे। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें धर्म, साक्षरता और व्यवसाय जैसे जनसांख्यिकीय आंकड़े जुटाए जाएंगे।
पूछे जाने वाले 33 प्रमुख सवाल
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:
- आवास का विवरण: मकान की निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), मकान की स्थिति और कमरों की संख्या।
- परिवार की जानकारी: मुखिया का नाम, लिंग, जाति और परिवार में विवाहित जोड़ों की संख्या।
- बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी का स्रोत, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, रसोईघर और ईंधन का प्रकार।
- डिजिटल और परिवहन साधन: इंटरनेट, स्मार्टफोन, लैपटॉप, रेडियो, टीवी के साथ-साथ वाहन (साइकिल, कार, बाइक आदि) की उपलब्धता।
जिला जनगणना अधिकारी कुमार प्रशांत के अनुसार, प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं और वर्तमान में कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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