कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय अचानक गहमागहमी बढ़ गई, जब जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से छह साल के लिए निष्कासित नेता छोटू सिंह और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के बीच जेडीयू कार्यालय में एक रहस्यमयी मुलाकात हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब छोटू सिंह की हालिया निष्कासन की कार्रवाई राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
बंद कमरे में लंबी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, छोटू सिंह और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के बीच जेडीयू कार्यालय के भीतर एक बंद कमरे में लगभग पांच से दस मिनट तक गोपनीय बातचीत हुई। इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति की मौजूदगी नहीं थी, जिसने इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थों को और गहरा कर दिया है।
मुलाकात के क्रम में पहले निष्कासित नेता छोटू सिंह बाहर निकले, और उसके कुछ ही मिनटों बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी बाहर आए। हालांकि, जब मीडिया कर्मियों ने उनसे इस अचानक हुई बैठक और इसके एजेंडे के बारे में जानने की कोशिश की, तो मंत्री निशांत कुमार ने चुप्पी साधे रखी और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से रवाना हो गए।
निष्कासन के बाद की स्थिति
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में छोटू सिंह के खिलाफ जेडीयू नेतृत्व ने कठोर कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इस निष्कासन के बाद से ही छोटू सिंह के भविष्य के राजनीतिक कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में एक मौजूदा कैबिनेट मंत्री के साथ उनकी यह मुलाकात कई तरह के कयासों को जन्म दे रही है।
क्या हैं सियासी मायने?
पार्टी से बाहर होने के बावजूद एक प्रभावशाली मंत्री के साथ हुई यह मुलाकात साधारण नहीं हो सकती। क्या यह किसी प्रकार के सुलह की कोशिश है, या फिर यह आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने का संकेत है? मंत्री की चुप्पी ने इन सवालों को और अधिक बल दे दिया है।
फिलहाल इस मुलाकात के बाद पटना के सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। जेडीयू नेतृत्व और छोटू सिंह की तरफ से आधिकारिक रूप से इस बैठक का कोई विवरण नहीं दिया गया है लेकिन राज्य की राजनीति में इस घटना को एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

