भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र गुरुवार को काफी हंगामे के साथ शुरू हुआ। कांग्रेस विधायकों ने क्योंझर की घटना को लेकर नारेबाजी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पोडियम के पास पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
भारी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री मोहन माझी ने लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर चर्चा का प्रस्ताव पेश किया और इस अवसर का उपयोग विपक्ष पर तीखा हमला करने के लिए किया। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “महिलाओं के साथ उचित न्याय नहीं किया गया है। चर्चा के लिए आगे आने के बजाय, नकारात्मक टिप्पणियां की जा रही हैं।”
उन्होंने सदन को याद दिलाया कि कांग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान महिला आरक्षण विधेयक पारित करने में विफल रही थी। साथ ही उन्होंने बीजू जनता दल (बीजेडी) पर भी तंज कसा कि उनकी वकालत केवल पंचायत स्तर के आरक्षण तक सीमित रही। उन्होंने सवाल किया, “जब विधायक या सांसद की बात आती है तो पीछे क्यों हट जाते हैं?” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण से अन्य समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति, केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्य की अपनी उपमुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष के इस रुख पर “महिलाएं उचित जवाब देंगी।”
दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक राम चंद्र कदम ने क्योंझर की घटना पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने उस घटना की कड़ी निंदा की, जिसमें एक आदिवासी महिला के कंकाल को बैंक शाखा में लाया गया था ताकि उसका भाई पैसे निकाल सके। कदम ने कहा, “वैश्विक स्तर पर ओडिशा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।” कांग्रेस नेता तारा बाहिनीपति ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि यह घटना मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले में हुई है।
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