वाराणसी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया. इस दौरान शिक्षकों से आह्वान किया कि वे आचार्य चाणक्य, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे महान शिक्षकों को अपना आदर्श बनाएं. उन्होंने कहा कि चाणक्य जैसे गुरु राष्ट्र को शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनाते हैं तथा ऐसी शिक्षा व्यवस्था देश की अखंडता और सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी होती है.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं. उन्होंने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाए, लेकिन यह जिम्मेदारी शिक्षकों की सबसे अधिक है. उन्होंने निपुण भारत अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन बताते हुए कहा कि हर बच्चे को पारंगत बनाना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है और मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को निहित स्वार्थों के कारण गंभीर नुकसान पहुंचाया गया था, जिससे प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी में पहुंच गया. पिछले नौ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता और आज शिक्षकों को सम्मान तथा पहचान दोनों प्राप्त हो रहे हैं.
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण भूमिका है. भारतीय परंपरा और आधुनिक आवश्यकताओं पर आधारित नई शिक्षा नीति भविष्य के भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी.
नई योजना के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रितों को आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी. योजना के लिए विकसित डिजिटल पोर्टल पर अब तक 7.89 लाख से अधिक शिक्षकों ने पंजीकरण कराया है. सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनके माध्यम से वे देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में निशुल्क इलाज करा सकेंगे. राज्य सरकार जल्द ही इस योजना का विस्तार उच्च शिक्षा विभाग तक भी करेगी, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे.

