कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़ : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो ने नया इतिहास रच दिया है। हरियाणा की धरती से निकले जुझारू खिलाड़ियों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो आज तक कोई भारतीय जूडो खिलाड़ी नहीं कर पाया था। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूडो में भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीत लिए।

अस्मिता डे ने दिलाया पहला ऐतिहासिक गोल्ड

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे ने कनाडा की खिलाड़ी को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी को शिकस्त देकर गोल्ड मेडल जीत लिया। इन दोनों जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय जूडो खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जीतने का गौरव हासिल किया है।

यामिनी मौर्य ने जीता रजत, बढ़ाया भारत का मान

भारत के लिए एक और अच्छी खबर यामिनी मौर्य ने दी। महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की एसिल्या तोप्राक के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। हालांकि वह स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से चूक गईं, लेकिन शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। खासकर अस्मिता डे और हर्ष सिंह के स्वर्ण पदकों ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है। हरियाणा के खिलाड़ियों की इस सफलता से पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है और खेल प्रेमी इसे भारतीय जूडो के नए स्वर्णिम दौर की शुरुआत मान रहे हैं।

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