कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के एक बयान ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है। गुप्ता के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए हरियाणा कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आंदोलन में विदेशी ताकतों के समर्थन और आतंकवादियों की मौजूदगी संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए सरकार से इनके ठोस सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने आंदोलन को लेकर बेहद गंभीर दावे किए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि आंदोलन में विदेशी ताकतों या आतंकवादियों की मौजूदगी जैसी कोई जानकारी है, तो इसके प्रमाण क्या हैं और ये जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
कांग्रेस ने तंज कसते हुए पूछा कि “जो बातें केंद्रीय गृह मंत्री को भी नहीं मालूम, वो हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को कैसे मालूम हो गईं?” पार्टी का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं लगाए जाने चाहिए, बल्कि इनके पीछे ठोस और प्रमाणित तथ्य होने चाहिए।
कांग्रेस ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के बयान को छात्रों के आंदोलन की छवि पर सवाल खड़ा करने की कोशिश करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार और व्यवस्था से सवाल पूछना किसी भी तरह आतंकवाद नहीं है। पार्टी ने कहा कि युवाओं और छात्रों की आवाज को इस तरह के आरोपों के जरिए बदनाम करने के बजाय सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।
राजनीतिक बयान से कूटनीतिक सवाल तक पहुंचा मामला
इस पूरे विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कूटनीतिक (diplomatic) पहलू भी जुड़ गया है। आंदोलन में विदेशी ताकतों की कथित भूमिका का दावा अपने आप में गंभीर है, क्योंकि ऐसे आरोप भारत की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ विदेशी हस्तक्षेप के सवाल से भी जुड़े होते हैं। कांग्रेस ने इसी आधार पर भाजपा से पूछा है कि क्या इन दावों के पीछे केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की कोई रिपोर्ट, जांच या खुफिया इनपुट मौजूद है।
अब राजनीतिक नजरें इस बात पर हैं कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अपने बयान में लगाए गए गंभीर दावों के समर्थन में क्या तथ्य या प्रमाण सामने रखती हैं। यदि कोई आधिकारिक इनपुट मौजूद है तो उसकी प्रकृति क्या है और यदि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, तो कांग्रेस के हमले के बीच भाजपा इस बयान को किस आधार पर सही ठहराती है—यह आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल, कांग्रेस के सवालों ने जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। मामला अब केवल आंदोलन और छात्रों के मुद्दों तक सीमित न रहकर विदेशी हस्तक्षेप, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक बयानबाजी की विश्वसनीयता के सवाल तक पहुंच गया है।
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