“Fear is slavery, work is liberty, courage is victory” — जीवन का गहरा सत्य उजागर करती है यह पंक्ति. भय मनुष्य को भीतर से जकड़ लेता है और यही जकड़न हमारी सोच, निर्णय और संभावनाओं को सीमित कर देती है. जब डर हम पर हावी होता है तब हम अपने ही बनाए बंधनों में कैद हो जाते हैं. इसी वजह से भय को दासता कहा गया है.
भय से उपजी दासता से बचने का पहला और सबसे कारगर उपाय है उद्यम, कहा भी गया है कि कर्म ही सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग है. जब हम बिना डर के, पूरे समर्पण और मेहनत के साथ कार्य करते हैं तब हम पहचानते हैं अपने भीतर की शक्ति को. कर्म हमें आत्मनिर्भर बनाता है, आत्मविश्वास देता है और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है. जो व्यक्ति उद्यम में विश्वास करता है वह परिस्थितियों का गुलाम नहीं अपने भाग्य का निर्माता बन जाता है.

केवल याद रखने वाली बात यह है कि सिर्फ़ कर्म करना ही पर्याप्त नहीं है उसमें साहस का होना भी अनिवार्य है. साहस वह ईंधन है जिसको शक्ति से हम कठिनाइयों का सामना कर पाते हैं. जब हम डर से पराक्रम तक का सफ़र पूरा करते हैं तब ही हमें हासिल होती है सच्ची जीत. सांसारिक विजय के लिए अनिवार्य है कि हम अपने भीतर के भय पर विजय प्राप्त करें.
सफलता की मार्ग का सबसे बड़ा रोड़ा है भय, सबसे बेहतर वाहन है कर्म और सबसे कुशल चालक है साहस. इसलिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले भय को त्यागना होगा, कर्म को अपनाना होगा और साहस को अपना साथी बनाना होगा. इसे सफलता के मूल मंत्रों में शामिल करना होगा. स्मरण रखिए, जो डर गया वह रुक गया, जो चल पड़ा वो पहुंच गया और जो डटा रहा वह जीत गया.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक, न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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