दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने तैमूर नगर नाले में कचरा डालने और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में वह पीछे नहीं हटेगी। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह नाले और आसपास के क्षेत्रों में कचरा फैलाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने को बढ़ाकर 5,000 रुपये तक करने की संभावना पर विचार करे। अदालत ने कहा कि शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

जुर्माना लगाने की जिम्मेदारी तय करे MCD

जस्टिस  प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस  मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि नाले में कचरा डाले जाने से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है और पूरे इलाके में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। अदालत ने संबंधित नागरिक एजेंसियों से कहा है कि वे क्षेत्र में कचरा फेंकने वालों की पहचान और उन पर जुर्माना लगाने के लिए जिम्मेदारी तय करें। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि इलाके की सफाई व्यवस्था और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।

नाले में कचरा डालने वालों पर होगी सख्ती

अदालत ने कहा कि अगर इलाके में कोई भी व्यक्ति नाले को गंदा करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में पीठ पीछे नहीं हटेगी। नाले में कचरा जमा होने से जल निकासी प्रभावित होती है और पूरे इलाके में भारी जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर गंदगी फैलाने वालों पर लगाया जाने वाला जुर्माना बढ़ाया जा सकता है। पीठ ने नागरिक एजेंसियों को कचरा फेंकने वालों की जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जुर्माने की रकम बढ़ाए MCD

अदालत ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को जुर्माने की राशि बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि कूड़ा डालने और गंदगी फैलाने पर जुर्माने की रकम बढ़ाकर 5,000 रुपये तक की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि एमसीडी इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर आगे की कार्रवाई करे। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि अदालत के आदेश की जानकारी स्थानीय बीट कांस्टेबलों (पुलिसकर्मियों) को दी जाए, ताकि वे नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में मदद कर सकें। हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मानसून के दौरान जलभराव और बारिश के पानी की समस्या को लेकर तैमूर नगर नाले के किनारे हुए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति को रोकने के लिए नाले की सफाई और उसके आसपास की जगह को व्यवस्थित रखना जरूरी है। पीठ राजधानी में बारिश के पानी के जमाव और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही है। इसी दौरान अदालत ने तैमूर नगर नाले की स्थिति पर चिंता जताई और पहले दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। हाई कोर्ट ने इससे पहले मानसून के मौसम में इलाके में जलभराव और संभावित बाढ़ की स्थिति को रोकने के लिए नाले के किनारे से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि सामने आई तस्वीरों से स्पष्ट है कि नाले में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है और उसमें लगातार कचरा डाला जा रहा है। सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम (MCD) के वकील ने अदालत को बताया कि महारानी बाग और तैमूर नगर दोनों इलाकों में रोजाना सफाई की जा रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि बार-बार यह देखा गया है कि स्थानीय लोग दोबारा वहां कचरा जमा कर देते हैं। पीठ ने कहा कि नालों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना जरूरी है, खासकर मानसून के दौरान, जब कचरे और अतिक्रमण के कारण जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।

हाई कोर्ट ने मांगी अनुपालन रिपोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने तैमूर नगर नाले में कचरा फेंकने और सफाई व्यवस्था से जुड़े मामले में अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने अपने पहले के उस आदेश पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है, जिसमें कचरा डालने वालों पर कड़े जुर्माने लगाने के निर्देश दिए गए थे। पीठ ने इलाके के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि नाले की सफाई बनाए रखने और लोगों को कचरा न डालने के लिए जागरूक करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाले में कचरा जमा होने और सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। उस दौरान संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करेंगे।

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