Business Desk – Crypto Market Crash : 19 जून 2026 को भी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट का दौर जारी है. अमेरिका-ईरान के बीच डील के ऐलान के बाद बाजार में तेजी आई थी और उम्मीद जताई जा रही थी कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद क्रिप्टोकरेंसी में और उछाल आएगा.

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निवेशकों की धारणा बदल दी. फेड ने इस बार ब्याज दरों में कटौती नहीं की और निकट भविष्य में कटौती की संभावनाएं भी लगभग खत्म कर दीं, जिसका असर अब क्रिप्टो बाजार पर दिख रहा है.
3 दिन में बिटकॉइन 4,000 डॉलर से ज्यादा टूटा
16 जून 2026 को बिटकॉइन की कीमत 66,000 डॉलर से ऊपर थी. बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह 70,000 डॉलर का स्तर पार कर सकता है. हालांकि तेजी की जगह बिकवाली हावी हो गई. 19 जून की सुबह 10 बजे तक बिटकॉइन करीब 2% की गिरावट के साथ 62,547.30 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. इस तरह केवल तीन दिनों में इसकी कीमत में 4,000 डॉलर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख माना जा रहा है. ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखने के संकेतों से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिसके चलते निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों (Risk Assets) से दूरी बना रहे हैं. इसके अलावा बिटकॉइन ETF से बढ़ते आउटफ्लो ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है.
इथेरियम, सोलाना और Pi कॉइन भी फिसले
बिटकॉइन के साथ अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी गिरावट देखी गई. पिछले 24 घंटे में इथेरियम 2.24% टूटकर 1,690.66 डॉलर पर आ गया. सोलाना 3.56% की गिरावट के साथ 68.46 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. वहीं Pi कॉइन 0.31% फिसलकर 0.1301 डॉलर पर पहुंच गया.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बिटकॉइन, इथेरियम और सोलाना जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में जारी गिरावट को कुछ निवेशक खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि कम कीमत पर बाजार में एंट्री की संभावना बनती है. हालांकि, क्रिप्टो बाजार में उतार-चढ़ाव काफी अधिक रहता है और निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम का आकलन करना चाहिए.

