यमुना के डूब क्षेत्र (ओ जोन) में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के कड़े रुख के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अब तक की गई कार्रवाई और भविष्य की योजना को लेकर विस्तृत जानकारी अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की। DDA ने NGT को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में यमुना के ओ जोन में किसी भी प्रकार के नए अवैध निर्माण पर बिना किसी ढील के रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पहले से मौजूद अवैध ढांचों को चिन्हित कर उन्हें ध्वस्त करने और अतिक्रमण हटाने के लिए भी सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति का ब्यौरा पेश किया। DDA ने NGT को बताया कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यमुना के फ्लड प्लेन में किसी भी रिहायशी कॉलोनी का अस्तित्व पर्यावरण और नदी दोनों के लिए गंभीर खतरा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि ओ जोन में किसी भी नए निर्माण को बिना किसी ढील के रोका जाए और अवैध ढांचों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि जोन ओ की 91 अवैध कॉलोनियों को 31 दिसंबर 2026 तक दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी राहत दी गई है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया है कि इस राहत का मतलब निर्माण गतिविधियों की अनुमति नहींहै। इन कॉलोनियों में कोई नया निर्माण, मरम्मत या रेनोवेशन नहीं किया जा सकेगा।
DDA के अनुसार, मदनपुर खादर गांव में करीब दो एकड़ जमीन पर बनी बाउंड्री वॉल, अवैध प्लॉटिंग, दुकानों और गोदामों को ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा झंगोला गांव में चलाए गए अभियान के दौरान लगभग 1.03 एकड़ जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
शिकायतों के लिए DDA ने जारी किया ईमेल
DDA के अनुसार, यमुना फ्लड प्लेन में किसी भी अवैध निर्माण, अतिक्रमण या नई निर्माण गतिविधि की जानकारी लोग [email protected] पर भेज सकते हैं। शिकायतों के आधार पर संबंधित एजेंसियां जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगी। सुनवाई के दौरान जगतपुर, वजीराबाद, रामघाट और मजनू का टीला जैसे क्षेत्रों में नए अवैध निर्माण की तस्वीरें सामने आने पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने इस मामले में नगर निगम (MCD) से संबंधित कार्यपालक अभियंताओं (Executive Engineers) और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यमुना के फ्लड प्लेन में किसी भी तरह के नए अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि इस क्षेत्र में किसी धार्मिक ढांचे से जुड़ा मामला सामने आता है, तो उसे संबंधित धार्मिक समिति या संबंधित उप-मंडल दंडाधिकारी (SDM) के समक्ष रखा जाए, ताकि कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जा सके।
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