चंडीगढ़: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हादसे को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि यह राजनीति करने का नहीं, बल्कि बचाव और राहत कार्य का समय है।

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उनकी NSUI की टीम राहत कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने दावा किया कि हादसे के बाद करीब 25-26 बच्चों के मलबे में फंसे होने की आशंका है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक उन्हें कोई सटीक आंकड़ा नहीं बताया गया है। उन्होंने बचाव अभियान में सभी से सहयोग की अपील की।

सांसद ने कहा कि दिल्ली में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और यह कोई पहला मामला नहीं है। उन्होंने बीते 31 मई को साकेत में पांच छात्रों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले सत्य निकेतन में भी ऐसी घटना हो चुकी है। हुड्डा ने सवाल उठाया कि पिछले दो-तीन वर्षों से दिल्ली में इस तरह के हादसे लगातार क्यों हो रहे हैं।

DU के पूर्व छात्र के तौर पर दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार और स्थानीय निकायों से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर और कितने छात्रों की जान जाने के बाद व्यवस्था जागेगी। उन्होंने MCD, NDMC और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बिना निर्धारित मानकों के चल रहे PGs (पेइंग गेस्ट आवास) और प्रशासन में भ्रष्टाचार की वजह से मासूम छात्रों की जान खतरे में पड़ रही है।

उन्होंने जानलेवा बताए जा रहे PGs के संचालन को लेकर स्थानीय विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाया। हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार हादसों के बाद कार्रवाई करने के बजाय मीडिया मैनेजमेंट में लग जाती है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मुद्दा है और प्रशासन को हादसों का इंतजार करने के बजाय पहले से ऐसी इमारतों और PGs की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और छात्र की जान खतरे में न पड़े।

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