आशुतोष द्विवेदी,रीवा। विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र रीवा का संजय गांधी अस्पताल इन दिनों इलाज का मंदिर नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थाओं का गढ़ बनता नजर आ रहा है। प्रसूता और नवजात की दर्दनाक मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल से मरीज के कूदने, तीमारदारों से मारपीट, छज्जा गिरने और कथित तौर पर ‘जिंदा मरीज को मृत घोषित’ करने जैसी दिल दहला देने वाली घटनाओं ने स्वास्थ्य महकमे की कलई खोलकर रख दी है। इस प्रशासनिक बदहाली के खिलाफ अब जनाक्रोश चरम पर पहुंच चुका है, जिसकी सीधी आंच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह क्षेत्र और उनके अमहिया स्थित निजी आवास तक जा पहुंची है।

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सुरक्षा घेरा तोड़ बंगले में घुसे कार्यकर्ता, पुलिस से तीखी झूमाझटकी

रविवार को रीवा की सड़कों पर युवक कांग्रेस का अप्रत्याशित और उग्र रूप देखने को मिला। यूथ कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के अमहिया स्थित बंगले का घेराव करने पहुंचे। विरोध की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कार्यकर्ता पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए सीधे बंगले के परिसर में दाखिल हो गए। मौके पर तैनात पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी झड़प और झूमाझटकी की स्थिति बनी रही, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर प्रदर्शनकारियों को बाहर किया गया।

हादसों पर उबला गुस्सा

प्रसूता कल्पना मिश्रा व नवजात की मौत: संजय गांधी अस्पताल में हुई इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार धरने पर बैठा है। विभागीय स्तर पर मामूली कार्रवाई हुई, लेकिन परिजन आपराधिक FIR की मांग पर अड़े हैं।

जिंदा मरीज को मृत घोषित करने का आरोप: अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही का आलम यह रहा कि एक मरीज को कथित तौर पर जीवित रहते ही मृत बता दिया गया, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया।

असुरक्षा और अव्यवस्था का दौर: अस्पताल की 5वीं मंजिल से मरीज का छलांग लगाना, जर्जर भवन का छज्जा गिरना और आए दिन सुरक्षाकर्मियों व तीमारदारों के बीच मारपीट होना अब आम बात हो चुकी है।

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गहराया सियासी संकट

प्रदर्शनकारी यूथ कांग्रेस नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि जब रीवा जैसे हाई-प्रोफाइल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल है तो बाकी प्रदेश की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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