प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित अति प्राचीन और ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ बीती रात लगभग डेढ़ से दो बजे के बीच अचानक भरभरा कर धराशायी हो गया। पुराने महाकाल थाने के पीछे सीढ़ियों के पास बना यह पत्थर का प्राचीन द्वार निर्माण कार्यों के तहत की जा रही गहरी खुदाई की लापरवाही के कारण ढह गया। गनीमत यह रही कि हादसा मध्य रात्रि में हुआ, जब आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा और जनहानि होने से टल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
ये भी पढ़ें: दतिया पीतांबरा पीठ में सुरक्षा सख्त! गर्भगृह में साधना बैन, दानपेटी की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
बगैर सपोर्ट छोड़ दिया गया था पत्थर का ऐतिहासिक गेट
घटना का मुख्य कारण स्मार्ट सिटी/विकास कार्यों के तहत आसपास की जा रही लापरवाही पूर्वक गहरीकरण और खुदाई को माना जा रहा है। निर्माण एजेंसी ने गहरी खुदाई के दौरान इस विशाल पत्थर के गेट को बिना किसी सुरक्षा या बेस सपोर्ट के छोड़ दिया था। बेस कमजोर होने के चलते बीती रात द्वार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। स्थानीय रहवासियों के अनुसार इस द्वार में दोनों ओर दो पवित्र गणेश प्रतिमाएं भी विराजमान थीं। प्राचीन काल में महाकाल दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु गणेश जी के दर्शन कर इसी मुख्य द्वार से आगे बढ़ते थे।
ये भी पढ़ें: शिक्षकों से ही गढ़ता है देश का भविष्य! खंडवा में गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान
कुछ समय पूर्व ही 2.12 करोड़ रुपये से हुआ था जीर्णोद्धार
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह द्वार हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा था, जिसे प्राचीन धरोहर के रूप में सहेज कर रखने की योजना थी। कुछ समय पूर्व ही उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) द्वारा लगभग 2 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्धार कर चमकाया गया था। इतने भारी-भरकम बजट के खर्च के बावजूद निर्माण एजेंसी की घोर लापरवाही के कारण 100 साल से भी अधिक पुरानी धरोहर जमींदोज हो गई, जिसे लेकर अब प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m



