हेमंत शर्मा, इंदौर। भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज के बाद अब इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बड़ी इंजीनियरिंग लापरवाही का नया उदाहरण बनकर सामने आया है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद इस ब्रिज में ऐसी गंभीर तकनीकी खामी मिली है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती थी। चार साल से बन रहा यह ब्रिज आज भी अधूरा है और अब डिजाइन में बदलाव के कारण इसका काम फिर से छह महीने आगे बढ़ गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता की जान और उनके टैक्स के पैसों के साथ यह प्रयोग कब तक चलता रहेगा?
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MANIT की टीम ने पकड़ी भारी चूक
इंदौर के रेती मंडी ब्रिज में सबसे बड़ी खामी इसके टर्निंग पॉइंट पर सामने आई है। यहां सड़क की चौड़ाई सिर्फ 7.50 मीटर रखी गई थी। जब प्रूफ चेक करने के लिए मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) की टीम पहुंची, तो विशेषज्ञों ने इसे गंभीर तकनीकी गलती माना और मामला संज्ञान में लिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
डैमेज कंट्रोल में जुटा PWD, बढ़ेंगे दो नए पिलर
तकनीकी खामी उजागर होने के बाद अब लोक निर्माण विभाग (PWD) को पूरा डिजाइन बदलना पड़ रहा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई को 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर किया जा रहा है। इस अतिरिक्त चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए अब दो नए पिलर खड़े किए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआत में प्लानिंग के तहत होना चाहिए था वह अब करोड़ों रुपए बर्बाद होने के बाद किया जा रहा है। फिलहाल PWD डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन जिम्मेदार इंजीनियरों पर क्या कार्रवाई होगी इस पर अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
विशेषज्ञ बोले- ‘अतिरिक्त वाइडनिंग थी जरूरी’
इस मामले पर तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ का कहना है कि उन्होंने पहले ही सरकार के संज्ञान में यह मामला लाया था। उनके मुताबिक किसी भी टर्निंग पॉइंट पर सिर्फ 7.50 मीटर की चौड़ाई पर्याप्त नहीं होती। वहां वाहनों को सुरक्षित मुड़ने के लिए चौड़ीकरण की जरूरत थी। अगर समय रहते इस तकनीकी खामी को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां डरावने हादसे देखने को मिल सकते थे।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘इंदौर को प्रयोगशाला बना दिया’
इस मुद्दे को लेकर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस ने पीडब्ल्यूडी विभाग को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग ने इंदौर शहर को अपनी लापरवाही की प्रयोगशाला बना रखा है। उन्होंने कहा, कहीं 90 डिग्री का खतरनाक ब्रिज बनाया जाता है, कहीं पिलर ही गायब कर दिए जाते हैं, तो कहीं Z आकार का ब्रिज खड़ा कर दिया जाता है। बिना किसी ठोस प्लानिंग के किए जा रहे इन कामों से जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।
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सवाल कई जवाब अधूरे!
रेती मंडी ब्रिज अब सिर्फ एक अधूरा प्रोजेक्ट नहीं रह गया है बल्कि यह लचर सिस्टम, इंजीनियरिंग की चूक और सरकारी धन की बर्बादी का बड़ा प्रतीक बन चुका है। अब देखना होगा कि इस गंभीर लापरवाही को दबाया जाता है या फिर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों पर कोई कड़ा एक्शन लिया जाता है।

