दिल्ली की सड़कों पर कूड़ा प्रबंधन और आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या को लेकर विधानसभा में उठी चिंताओं के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता (Vijendra Gupta) ने दोनों मामलों को MCD संबंधी विशेष समिति को भेज दिया है। सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विभिन्न विधायकों ने राजधानी में कूड़े के निस्तारण और आवारा पशुओं से जुड़ी नागरिक समस्याओं का मुद्दा उठाया। इस पर संज्ञान लेते हुए स्पीकर ने मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए इसे समिति के पास भेजने का निर्देश दिया।
अध्यक्ष ने कहा कि कूड़ा प्रबंधन से संबंधित मामलों पर MCD के आयुक्त (कमिश्नर) समिति के समक्ष उपस्थित होकर सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों और शिकायतों का जवाब दें। साथ ही, निगम को इस विषय में की गई कार्रवाई की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी प्रस्तुत करनी होगी। विजेंद्र गुप्ता ने निर्देश दिया कि एमसीडी समिति को राजधानी में कूड़ा प्रबंधन की वर्तमान व्यवस्था, कचरा संग्रहण और निस्तारण की प्रक्रिया, सफाई व्यवस्था की स्थिति तथा सुधार के लिए उठाए गए कदमों का स्पष्ट और तथ्यात्मक विवरण उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े ऐसे मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है और संबंधित एजेंसियों को विधानसभा की समिति के समक्ष अपनी कार्यप्रणाली और सुधारात्मक प्रयासों की जानकारी देनी होगी।
सफाई व्यवस्था MCD की जिम्मेदारी
दिल्ली विधानसभा में राजधानी की सफाई व्यवस्था और कूड़ा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। इस मुद्दे को विधायक डॉ. अनिल गोयल ने नियम 280 के तहत सदन में उठाया और शहर के विभिन्न इलाकों में कूड़ा निस्तारण से जुड़ी समस्याओं की ओर सरकार और सदन का ध्यान आकर्षित किया। डॉ. गोयल ने अपने वक्तव्य में कूड़ा जमा होने वाले स्थानों, खुले पड़े कूड़ेदानों, समय पर कचरा न उठाए जाने तथा स्वच्छता व्यवस्था में कमियों जैसे मुद्दों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले पर संज्ञान लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि राजधानी में स्वच्छता और सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी MCD की है और निगम को अपने दायित्वों का प्रभावी तथा जवाबदेह तरीके से निर्वहन करना चाहिए।
जवाबदेही तय करने पर जोर
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केवल सफाई व्यवस्था की समीक्षा ही नहीं, बल्कि कूड़ा संग्रहण कार्य से जुड़े कर्मचारियों और एजेंसियों की जवाबदेही की भी जांच की जानी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि जिन क्षेत्रों में कूड़ा उठाने और सफाई का कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है, वहां जिम्मेदार कर्मचारियों और संबंधित तंत्र के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वहीं, आवारा पशुओं का मुद्दा विधायक हरीश खुराना ने सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि राजधानी के कई इलाकों में सड़कों पर बड़ी संख्या में आवारा पशु घूमते दिखाई देते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। हरीश खुराना ने आरोप लगाया कि कुछ अनधिकृत डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि इस वजह से कई इलाकों में नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सड़क सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि सड़कों पर खुले में घूम रहे पशु लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं और आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान स्पीकर ने कहा कि राजधानी के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह पशुओं को सड़कों पर छोड़ा जा रहा है, उससे यह प्रतीत होता है कि इसके पीछे कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस पहलू की गहन जांच किए जाने की आवश्यकता है, ताकि समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।
अध्यक्ष ने आवारा पशुओं की मौजूदा स्थिति को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और अब तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुविधा के साथ-साथ पशुओं के कल्याण को भी ध्यान में रखते हुए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि कई स्थानों पर आवारा पशुओं के कारण सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करनी होगी ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई का ब्योरा भी तलब
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने MCD के आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि राजधानी में बढ़ती यह समस्या जनसुरक्षा और पशु कल्याण दोनों से जुड़ी है, इसलिए इसका गंभीरता से परीक्षण किया जाना आवश्यक है। स्पीकर ने एमसीडी आयुक्त को निर्देश दिया कि वे दिल्ली में संचालित गौशालाओं की संख्या, उनके लिए उपलब्ध भूमि और क्षमता, बचाए गए या पकड़े गए पशुओं को रखने की व्यवस्था तथा उनके प्रबंधन से संबंधित पूरी जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत करें।
इसके अलावा उन्होंने यह भी पूछा है कि सड़कों से पशुओं को पकड़ने के बाद निगम द्वारा कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है और उन्हें किस प्रकार सुरक्षित स्थानों पर रखा जाता है। विधानसभा अध्यक्ष ने पशु प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता का भी आकलन करने को कहा है। विजेंद्र गुप्ता ने विशेष रूप से उन लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है, जो सार्वजनिक सड़कों पर पशुओं को छोड़ने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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