Delhi Garbage Mountains: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को कचरे के पहाड़ से मुक्त करने के लिए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) और दिल्ली एमसीडी (Delhi MCD) यानी दिल्ली नगर निगम ने कमर कस ली है। एमसीडी ने लैंडफिल साइटों के कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए ऐक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत कूड़े को 3 श्रेणियों में बांटकर कचरे का निपटारा किया जाएगा। इस संबंध में निगम अधिकारियों ने बताया कि तीनों लैंडफिल साइटों पर उपस्थित कचरे व कूड़े को तीन श्रेणी में बांट दिया गया है
इसमें 31 मार्च 2025 तक डाले गए कचरे को पुराने कचरे (लीगेसी कचरे) की श्रेणी में बांटा गया। इसके अतिरिक्त 31 मार्च 2025 के बाद के कचरे को आधे पुराने कचरे के श्रेणी में और ताजा कचरे (हर दिन उप्तन्न होने वाले कचरे) की श्रेणी में बांटा गया है।
एक्शन प्लान के तहत हर दिन निगम की समीक्षा रिपोर्ट कूड़े के निस्तारण की तैयार की जाएगी। इसके मद्देनजर तीनों लैंडफिल साइटों पर पुराने कचरे को जैव खनन (बायोमाइनिंग) के जरिए संसाधित व निस्तारित किया जाएगा। एक अप्रैल 2025 से लैंडफिल साइट पर आने वाले कचरे को और हर दिन आने वाले ताजा कचरे को निस्तारित करने के लिए भी लगातार विभिन्न माध्यम से कार्य हो रहा है। इसके तहत जैव खनन के जरिए लैंडफिल साइटों पर खाली हुई 40 एकड़ से अधिक की भूमि पर पांच संयंत्र अपशिष्ट प्रबंधन के तहत लगाए जा रहे हैं। हर दिन दिल्ली से अब लगभग 12 हजार मीट्रिक टन कूड़ा उत्पन्न हो रहा है। इसमें से लगभग 8100 मीट्रिक टन कूड़ा ऊर्जा संयंत्रों व निर्माणाधीन संयंत्रों व अन्य माध्यमों से निस्तारित, संसाधित व रिसाइकल किया जा रहा है। अब पांच नए एकीकृत कचरा संसाधित संयंत्र विकसित करने का कार्य शुरू हो चुका है।

इस साल के अंत तक भलस्वा व ओखला लैंडफिल साइटों से खत्म हो जाएगा कूड़े का पहाड़
निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि तीनों लैंडफिल साइटों पर मौजूद कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में हर दिन समीक्षा की जाती है। साथ ही, हर हफ्ते समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर लैंडफिल साइटों पर कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य का आकलन किया जा रहा है। इस साल के अंत तक भलस्वा व ओखला लैंडफिल साइटों पर वर्षों पुराने कचरे और कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह से खत्म करने की योजना बनाई गई है। गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े के पहाड़ को दिसंबर 2027 तक खत्म करने की योजना है।
596 करोड़ की लागत आएगी
पांच कूड़ा निस्तारण भलस्वा, ओखला, सिंघोला, गाजीपुर और नरेला-बवाना में कुल 5900 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के कूड़े के निस्तारण की आधुनिक संसाधित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं पर लगभग 596 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इतने कचरे का हो चुका है निस्तारण
MCD के मुताबिक साल 2019 से लेकर अब तक तीनों लैंडफिल साइटों पर लगभग 178 लाख मीट्रिक टन वर्षों पुराने और अन्य कचरे को जैव खनन से निस्तारित कर लिया है। वर्ष 2019 में तीनों लैंडफिल साइटों पर कुल 280 लाख मीट्रिक टन कचरा था, जिसमें से वर्षों पुराने कचरे को जैव खनन के जरिए भलस्वा लैंडफिल साइट पर 80 लाख मीट्रिक टन कचरा, गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 140 लाख मीट्रिक टन कचरा और ओखला लैंडफिल साइट पर 60 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था।
15 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद
निगम के आंकड़ों के तहत अब मौजूदा समय में गाजीपुर में लगभग 68 लाख मीट्रिक टन कचरा, भलस्वा में 19 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद है। ओखला में पुराना कचरे को निस्तारित किया जा चुका है। बाकी अन्य कचरा अभी ओखला लैंडफिल साइट पर लगभग 15 लाख मीट्रिक टन मौजूद है। जैव खनन और बाकी माध्यमों से और नए संयंत्रों के जरिए तीनों लैंडफिल साइटों पर मौजूद लगभग 102 लाख मीट्रिक टन कचरे को भी जल्द निस्तारित कर लिया जाएगा।
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