राजधानी दिल्ली में लगभग दो दशक से लागू बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) पॉलिसी को दिल्ली सरकार ने समाप्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था को खत्म कर जल्द ही नई और अधिक प्रभावी नीति लागू की जाएगी, जिसमें सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जाएगा। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि पुरानी बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इसके स्थान पर जल्द नई नीति लाई जाएगी, जो मौजूदा जरूरतों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगी।
जानकारी के अनुसार, मालवीय नगर में मई 2026 में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ लाइसेंस के तहत संचालित एक होटल में आग लग गई थी। जांच के दौरान पता चला कि जिस परिसर को सीमित आवास सुविधा के लिए पंजीकृत किया गया था, वहां कथित तौर पर होटल का संचालन किया जा रहा था और क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया गया था। इस घटना ने मौजूदा नीति की खामियों को उजागर कर दिया। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पुरानी पॉलिसी को समाप्त कर नई नीति लाई जाएगी, जो पहले से अधिक मजबूत होगी और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी आवासीय व्यवस्था का दुरुपयोग न हो और पर्यटकों व नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता न किया जाए।
बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी वर्ष 2007-08 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार द्वारा लागू की गई थी। इसे राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) के मद्देनजर शुरू किया गया था, ताकि जिन लोगों के घरों में एक या दो अतिरिक्त कमरे हों, वे उन्हें पर्यटकों और मेहमानों को किराये पर उपलब्ध करा सकें। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में ठहरने की सुविधाओं का विस्तार करना और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना था।
दिल्ली सरकार ने लगभग दो दशक पुरानी बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) पॉलिसी को औपचारिक रूप से समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सोमवार को दिल्ली विधानसभा में इस नीति को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी। अब सरकार जल्द ही नई और अधिक सख्त नीति लेकर आएगी।
दिल्ली सरकार ने विधानसभा में बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सदन ने पारित कर दिया। इससे पहले 7 अगस्त को दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने मॉनसून सत्र के दौरान ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) अधिनियम, 2007’ को निरस्त करने के लिए एक विधेयक पेश किया था।
सरकार का यह कदम मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुई भीषण आग की घटना के बाद उठाया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि बेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस की आड़ में कई स्थानों पर कथित तौर पर होटल संचालित किए जा रहे थे। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून में मौजूद खामियों के कारण ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा था। मालवीय नगर अग्निकांड राजधानी के सबसे बड़े होटल हादसों में से एक माना गया। इस दुर्घटना में करीब 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। मृतकों में चार नाइजीरिया, तीन किर्गिस्तान तथा एक-एक मोजाम्बिक, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, लाइबेरिया और इराक के नागरिक थे। इसके अलावा लगभग 20 से 22 विदेशी नागरिक घायल हुए थे।
6 कमरों की अनुमति पर चल रहे थे 25 कमरे
दिल्ली सरकार द्वारा बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) कानून को समाप्त करने के फैसले के पीछे मालवीय नगर के हौज रानी स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुई भीषण आग की घटना को प्रमुख कारण माना जा रहा है। जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने सरकार को मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। पुलिस जांच के अनुसार, होटल को दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी के तहत केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति मिली हुई थी, लेकिन परिसर में कथित तौर पर 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इनमें से कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे। इमारत के भूतल पर एक रेस्टोरेंट भी संचालित हो रहा था।
आरोप है कि होटल आवश्यक मंजूरियों और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना संचालित किया जा रहा था। आग की घटना के बाद पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इस हादसे में करीब 21 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। वहीं, 20 से अधिक विदेशी नागरिक घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा मानकों, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को लेकर कई सवाल उठे थे।
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