अनुराग शर्मा, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सरकारी रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन (Digitalization) की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला मुख्यालय के पास स्थित ग्राम खामलिया और नरेला में नए डिजिटल नक्शे, पुराने पारंपरिक मैनुअल नक्शों से मेल नहीं खा रहे हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी और त्रुटिपूर्ण सीमांकन के कारण वर्षों से शांति से रह रहे ग्रामीणों के बीच अब भारी तनाव, आपसी विवाद और सामाजिक अशांति की स्थिति निर्मित हो गई है। अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर दोनों गांवों के निवासियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को एक सामूहिक आवेदन सौंपा है।

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कागजों में बदले खेतों के ठिकाने, भाईचारे में घुला जहर

कलेक्ट्रेट में अपनी गुहार लेकर पहुंचे पीड़ित किसानों ने बताया कि वर्तमान में जो डिजिटल नक्शा शीट तैयार की गई है, वह पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। इस गड़बड़ी का सबसे घातक असर यह हुआ है कि जो किसान पीढ़ियों से अपनी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं, उनके खेत कागजों में अब दूसरों के नाम या किसी और के हिस्से में दिखाई दे रहे हैं।

इस गलत और त्रुटिपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड को आधार मानकर राजस्व विभाग द्वारा धड़ल्ले से सीमांकन की जा रही है जिसने जलती आग में घी का काम किया है। इस मिसमैच के कारण सगे-संबंधियों और पड़ोसियों के बीच का सदियों पुराना भाईचारा खत्म हो रहा है। सीधे-सादे और गरीब किसान परिवार इस सरकारी विसंगति की वजह से भारी आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं।

जमीनी कीमतों के उछाल से बढ़ा ‘अनुचित दबाव’

ग्रामीणों का आरोप है कि सीहोर के शहरी क्षेत्र से नजदीकी होने के कारण इन गांवों में जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में डिजिटल नक्शे की इस भारी चूक का फायदा उठाकर कुछ रसूखदार और चालाक लोग छोटे व गरीब किसानों पर अनुचित दबाव बना रहे हैं, जिससे गांवों में कभी भी कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

डिजिटल विसंगति दूर करने के लिए ग्रामीणों की मांगें

गांवों में हिंसक टकराव और विवाद की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के सामने ग्रामीणों ने अपनी मांगें रखी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान डिजिटल नक्शे के आधार पर की जा रही सभी व्यक्तिगत नपतियों यानि सीमांकन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए।

उनकी ये भी मांग है कि पूरे गांव का आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक यानी ETS (इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन) या DGPS (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के जरिए निष्पक्ष और नए सिरे से ‘सामूहिक बंदोबस्त’ व पुनः सर्वे कराया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

दोनों गांवों में राजस्व विभाग के विशेष शिविर लगाकर विसंगतियों का मौके पर स्थायी निपटारा किया जाए। गांवों में वर्षों से रह रहे भूमिहीन गरीब परिवारों को आवासीय पट्टों का वितरण किया जाए।

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क्या कहता है प्रशासन?

डिजिटल और मैनुअल नक्शों के इस गंभीर मिसमैच पर किसानों का गुस्सा देखने के बाद कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने इस तकनीकी त्रुटि की जांच कराने और उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया है जिससे गांवों में शांति व्यवस्था बनी रहे।

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