अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता मिडिल ईस्ट युद्ध की कहानी ही बदल रही है. US-ईरान के बीच हुए शांति समझौता को इजरायल ने अपनी तरफ से नकार दिया है और इस समझौते से खुश नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हुआ है, जिसका पाकिस्तान ने भी समर्थन किया है, लेकिन इज़राइल ने इस समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया है.
शांति समझौता में इजरायल ने पाकिस्तान की किसी भी भूमिका की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने साफ कहा कि इजरायल, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता है.
वाशिंगटन और तेहरान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते ने पश्चिम एशिया की जियोपॉलिटिक्स को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है. इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने अमेरिका-ईरान डील में लेबनान के शामिल होने की बात को भी खारिज कर दिया.
इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि, “मैंने कई बार इंटरव्यू में यह बात कही है. हम पकिस्तानियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करते है. मुझे लगता है कि उनका व्यवहार हमेशा ही निंदनीय रहा है.”

इजरायली राजदूत रूवेन का यह वक्तव्य उस समय आया जब US प्रेसीडेंट ने कहा था कि इजरायल और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध न होने के बावजूद पाकिस्तान इस क्षेत्र में भूमिका निभा सकता है.
इजरायल और पाकिस्तान के बीच रिश्ते हमेशा से कड़वाहट भरे रहे हैं. दोनों के बीच अप्रैल में तनाव तब बढ़ गया था जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को बुरा और मानवता के लिए अभिशाप बता दिया था.
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को “कैंसर” और “मानवता के लिए अभिशाप” कहा था.
इंटरव्यू के दौरान रूवेन अजार ने कहा कि लेबनान के भविष्य का फैसला लेबनान की सरकार को करना है, इसका फैसला कोई और कैसे कर सकता है. ये डील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए हुई है. हम हिज्बुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे.
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