भिलाईनगर। भिलाई स्टील प्लांट सहित सेल की अन्य यूनिट के कर्मियों के 39 माह के बकाया एरियर पर 3 सितंबर को नई दिल्ली में डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर सेंट्रल की उपस्थिति में सुलह बैठक हुई। इसमें सेल प्रबंधन ने इस्पात मंत्रालय का हवाला देते हुए 39 माह के एरियर को देने में एक तरह से असमर्थता जता दी। अगली सुलह बैठक 20 नवंबर को नई दिल्ली में फिर रखी गई है।

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यूनियनों ने डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ( सेंट्रल ) निरंजन कुमार को बताया कि 31 अक्टूबर 2025 के बाद उनकी मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है। प्रबंधन और यूनियनों के बीच 22.10.2021 को हस्ताक्षरित सम्झौता ज्ञापन के परिणामस्वरूप 01.01.2017 से 31.03.2020 तक की अवधि के बकाया का भुगतान न होने के कारण श्रमिकों में असंतोष है।

इस पर सेल प्रबंधन ने कहा कि इस्पात मंत्रालय / भारत सरकार से प्राप्त स्वीकृतियों के अनुसार वास्तविक भुगतान 01.04.2020 से किया जाना था और इसका अक्षरशः पालन किया गया है। हालांकि, 01.01.2017 से 31.03.2020 की अवधि को काल्पनिक गणना के लिए लिया गया है। मूल वेतन, महंगाई भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभों की बकाया राशि का भुगतान 1.04.2020 से पहले ही किया जा चुका है।

यूनियन नेताओं ने बताया कि समझौता ज्ञापन में 01.01.2017 से 31.03.2020 की अवधि के लिए काल्पनिक गणना का कोई उल्लेख नहीं है। समझौता ज्ञापन के अनुसार, वेतनमान 01.01.2017 से प्रभावी हैं, इसलिए उन्हें उक्त अवधि का बकाया भुगतान किया जाना चाहिए। समझौता ज्ञापन के पैरा संख्या 6.1 में उल्लेख है कि 01.04.2020 से वेतन समझौते के लागू होने होने तक की अवधि के लिए मूल वेतन, महंगाई भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभों का बकाया एक ही किस्त में दिया जाएगा।

यूनियनों ने यह भी बताया कि समझौता ज्ञापन आधार पर एक द्विपक्षीय समझौता होना था, जिस पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि 2024 के बाद से एनजेसीएस / द्विपक्षीय बैठक नहीं बुलाई गई है। यूनियन ने अनुरोध किया कि सेल प्रबंधन द्वारा एनजेसीएस की बैठक बुलाई बुलाई जाए और इस मुद्दे पर अंतिम समाधान के लिए बैठक में चर्चा की जाए।

9 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई और इस पर अगली एनजेसीएस बैठक में चर्चा की जाएगी, जो आज तक होनी बाकी है। नए वेतन संशोधन के अनुसार एचआरए की राशि को आज तक लागू किया जाना चाहिए।

सेल प्रबंधन के प्रतिनिधि ने बताया कि एनजेसीएस की उप-समिति, यानी द्विपक्षीय समिति की बैठक 9 दिसंबर 2025 को हुई थी और इसमें मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था। हालांकि, मुद्दों पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। बातचीत के परिणाम अगली सुलह बैठक में बताए जाएंगे। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर को सुबह 11.30 बजे तय की गई है।

दुर्ग में स्वाइन फ्लू के मिले 5 नए मरीज

दुर्ग। दुर्ग जिले में स्वाइन फ्लू के केस लगातार बढ़ रहा है जिले में 3 सितम्बर को 5 नए मरीज मिले है। जिनमें से 2 मरीज निजी अस्पताल में भर्ती है, 3 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। 5 अगस्त से आज तक कुल 22 स्वाइन फ्लू धनात्मक प्रकरण मिले, वर्तमान में जिले में कुल 10 एक्टिव मरीज है। इनमें 7, हॉस्पिटल में भर्ती है। वहीं 3 मरीज होम आइसोलेटेड है, जिनका विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकीय उपचार चल रहा है, जिनकी स्थिति अभी सामान्य है।

जिले में नये धनात्मक प्रकरण मिलने पर कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है, नियमित रूप से मरीजों की मोनिटरिंग की जा रही है । स्वाइन फ्लू को लेकर जिले में कुल 23 आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए है। साथ ही 158 बिस्तर आरक्षित किया गया है।

जिले में स्वाइन फ्लू के संबंध में कलेक्टर के निर्देशानुसार डॉ. मनोज दानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला दुर्ग, डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, जिला सर्वेलेंस अधिकारी, आईडीएसपी दुर्ग एवं सुश्री भूमिका वर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एन. एच. एम., दुर्ग के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

3 सितम्बर को जिला स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ संजीव ग्लैड, जिला सर्वेलेंस अधिकारी, डॉ सी.बी.एस. बंजारे, जिला मलेरिया अधिकारी, डॉ. रश्मि ग्लैड द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन, निकुम व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बटरेल के आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया गया।

शिक्षक पवन कुमार सिंह राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए अपात्र घोषित

दुर्ग। राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार- 2025 के लिए चयनित दुर्ग जिले के शिक्षक पवन कुमार सिंह को अब उनके संबंध में मिली शिकायत की जांच के आधार पर अपात्र घोषित कर दिया गया है।

पवन कुमार सिंह शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पोटिया में पदस्थ हैं और उन्होने अपने एकेडेमिक कार्यों को लेकर इस पुरस्कार के लिए लोक शिक्षण संचालनालय में दावा पेश किया था। उनके चयन के विरुद्ध राज्यपाल सचिवालय में शिकायत दर्ज कर पात्रता की जांच की मांग की गई थी। शिकायत में चयन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे।

शिकायत की जांच प्राप्त आपत्तियों के आधार पर राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार – 2025 के लिए किया गया चयन अमान्य घोषित कर दिया गया। इस निर्णय को पुरस्कार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर जिला शिक्षा कार्यालय ने पवन कुमार सिंह के संबंध में बिना जांच और बिना पुष्टि किए राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के लिए कैसे अनुशंसा कर दी।

वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग, टीईटी के लिए मिले पर्याप्त अवसर

दुर्ग। पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता को शिक्षकों के एक संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। नियुक्ति के समय टीईटी की ऐसी अनिवार्यता के संबंध में कोई स्पष्ट शर्त/निर्देश नहीं होने का हवाला देते हुए शिक्षकों ने गुरुवार को संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग को ज्ञापन सौंपा।

शिक्षकों का कहना है कि वे छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हैं। आरटीई अधिनियम, 2009 लागू होने से पूर्व / निर्धारित अवधि में नियुक्त होकर निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नियुक्ति के समय विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताएं पूर्ण की थी तथा उसी आधार पर हमें विधिवत नियुक्ति प्रदान की गई थी। नियुक्ति के समय टीईटी की ऐसी अनिवार्यता नहीं थी । अचानक टीईटी सर्टिफिकेट की माँग न्यायोचित नहीं है।

शिक्षकों ने कहा कि टीईटी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है, उसे एक तरह से दर किनार करते हुए पदोन्नति से वंचित करना, भारत के संविधान का अनुच्छेद 14 समानता एवं समान संरक्षण तथा अनुच्छेद 16 राज्य के अधीन सेवाओं में अवसर की समानता का हमारे अधिकार की अनदेखी की जा रही है।

वर्ष 2017 से वर्ष 2025 तक विभिन्न अवसरों पर अनेक सहायक शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति प्रदान की गई है। यदि वर्तमान में टीईटी को पदोन्नति की अनिवार्य शर्त माना जा रहा है, तो उसका स्पष्ट अधिसूचना / नियम / परिपत्र / कारण युक्त आदेश संबंधित शिक्षकों के समक्ष रखा जाना न्यायोचित होगा। वर्तमान परिस्थितियों में टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक माना जा रहा है, तो ऐसे शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिए गए 31 अगस्त 2028 तक पर्याप्त अवसर एवं युक्तियुक्त समय दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।

विभाग संबंधित शिक्षकों को पदोन्नति तक टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए। शिक्षकों ने मांग की है कि टीईटी को आधार बनाकर चल रही पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल स्थगित कर, सक्षम स्तर से स्पष्ट निर्णय एवं प्रभावित शिक्षकों को पर्याप्त अवसर प्रदान करने की कार्रवाई की जाए।

नौकरी का झांसा देकर 4 साल तक युवती का शरीरिक शोषण

छुरिया। नौकरी लगाने का झांसा देकर युवती का कथित रूप से करीब चार वर्षों तक शारीरिक शोषण करने के मामले में छुरिया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान वार्ड क्रमांक 4, सीताबर्डी पठानपारा, थाना छुरिया निवासी मो. सफदर खान पिता स्व. इसराइल खान के रूप में हुई है। मामले में थाना छुरिया में अपराध क्रमांक 163/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पीड़िता को वनरक्षक की नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। आरोपी ने पीड़िता से वनरक्षक भर्ती का प्रवेश पत्र भी लिया तथा नौकरी लगाने के नाम पर उसके पिता से 43 हजार रुपए लेने का आरोप है।

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को फोन कर अपने घर बुलाया और कथित रूप से जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। इसके बाद आरोपी द्वारा लगातार धमकी देकर पीड़िता का शारीरिक शोषण किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसे कार में बैठाकर भी कथित रूप से डराता- धमकाता था और बदनाम करने की धमकी देकर जबरदस्ती करता था। विरोध करने पर गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाया गया है। मामले की शिकायत के बाद छुरिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी मोहम्मद सफदर खान को 1 सितंबर 2026 की शाम 7.15 बजे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

मनगटा के पास बायोगैस प्लांट का ग्रामीणों ने किया विरोध

राजनांदगांव। प्रदेश में पर्यटन के लिए मशहूर मनघटा वन चेतना के पास बायोगैस प्लांट खोलने का आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे।

पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुरेन्द्र दास वैष्णव के नेतृत्व में ग्रामीण पहुंचे थे। राजनांदगांव तहसील में आज पेशी की अंतिम सुनवाई थी । झुराडबरी में बायोगैस प्लांट खोलने के लिए जमीन के आबंटन पर रोक लगाने की मांग पांच गांव के ग्रामीणों ने की है।

ग्रामीणों द्वारा बायोगैस लगाने से प्रदुषण होने की बात कही है। ग्रामीणों ने तहसीलदार कोर्ट में जमीन आबंटन पर रोक लगाने आपत्ति जताई हैं। जानकारी अनुसार झुराडबरी पहनं 18 राजस्व निरिक्षक मंडल खैरझिटी खसरा नंबर 672 व 161 से कुल 8.938 हेक्टेयर जमीन की मांग कंपनी द्वारा राजनांदगांव तहसील में की गई हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि नगरनिगम राजनांदगांव के शहर से निकलने वाले कचरे से बायोगैस बनाया जाएगा। इसके लिए यहां प्लांट डालने की प्रक्रिया चल रही हैं। जिसका ग्रामीणों ने गुरूवार को विरोध किया है।

इस दौरान मुढ़ीपार सरपंच मीना साहू, जोरातराई सरपंच, भेंडरवानी, बीरेझर, नवागांव, फुलझर के ग्रामीण बड़ी संख्या में तहसील कार्यालय पहुंचे थे। जहां तहसीलदार के नाम ज्ञापन देकर जमीन आबंटन पर आपत्ति दर्ज कराई है। जोरातराई के सरपंच रमाकांत ने बताया कि ग्रामीण नही चाहते है कि बायो प्लांट बनने से आसपास प्रदूषण हो और लोगो के स्वास्थ्य के लिए यह हानिकारक साबित हो।

सिंघोरी के तालाब से बेखौफ मुरूम उत्खनन

खैरागढ़। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत सिंघोरी में तालाब से कथित रूप से अवैध मुरूम उत्खनन का मामला सामने आया है।

आरोप है कि व्यावसायिक एवं निर्माण कार्यों में उपयोग के लिए तालाब से लगातार मुरूम निकाली जा रही है। उत्खनन के चलते तालाब का स्वरूप प्रभावित होने साथ यहां आने-जाने का रास्ता भी बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि संबंधित विभाग से वैध अनुमति नहीं ली गई है तो सार्वजनिक तालाब से इस तरह मुरूम निकालना गंभीर मामला है। सवाल यह है कि जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी कथित रूप से चल रही इस गतिविधि की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

जांच से सामने आ सकती है पूरी सच्चाई

प्रशासन द्वारा मौके का निरीक्षण, भूमि एवं उत्खनन की अनुमति की जांच तथा निकाली गई मरूम के परिवहन की पड़ताल की जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित उत्खनन इतने समय से कैसे चलता रहा और जिम्मेदार विभागों ने क्या कार्रवाई की जनहित का सवाल यही है कि सार्वजनिक तालाब और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? अब ग्रामीणों को जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।

भूमाफियाओं के हौसले बुलंद, प्रशासन मौन

ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि कथित उत्खननकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है। भूमाफियाओं और जिम्मेदार अथवा सेटलमेंट की चर्चाओं ने मामले को लोगों के बीच कथित आपसी सहमति और गंभीर बना दिया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन जनहित में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है तालाब जैसे सार्वजनिक जलस्रोत से मुरूम उत्खनन केवल खनिज नियमों का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीणों सार्वजनिक संसाधन और पर्यावरण से भी जुड़ा मामला है। यदि उत्खनन अवैध पाया जाता है तो प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ तालाब और प्रभावित रास्ते को पूर्व स्थिति में लाने की दिशा में भी कदम उठाना चाहिए।

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