दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को छात्र राजनीति में सक्रिय तीन प्रमुख प्रतिद्वंद्वी धड़ों ने अध्यक्ष पद के लिए अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही चुनाव में संभावित मुकाबले की तस्वीर भी साफ हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास को अपना प्रत्याशी बनाया है। संगठन की ओर से उनके नाम की घोषणा के साथ ही ABVP ने चुनावी अभियान की दिशा स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा पर भरोसा जताया है। शुक्रवार को संगठन ने उनके नाम का ऐलान किया। अब मीणा चुनाव में NSUI का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं, वामपंथी छात्र संगठन AISA और SFI ने इस बार संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दोनों संगठनों ने अध्यक्ष पद के लिए अनन्या रतूड़ी को अपना संयुक्त प्रत्याशी घोषित किया है।

DUSU चुनाव को लेकर अब सभी प्रमुख पदों पर प्रत्याशियों की स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव में मैदान में रहने वाले प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी गई है। अंतिम सूची के मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर पांच प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं। नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों की संख्या स्पष्ट होने से अब डूसू चुनाव की तस्वीर और साफ हो गई है। प्रमुख छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के साथ अन्य प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। अब सभी उम्मीदवारों के बीच प्रचार अभियान तेज होने की संभावना है।

18 सितंबर को मतदान, 19 को मतगणना

डूसू चुनाव के लिए 18 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 19 सितंबर को मतों की गिनती होगी। चुनाव को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बार अध्यक्ष पद के लिए ABVP ने यश डबास, NSUI ने विजय शंकर मीणा, जबकि AISA और SFI ने संयुक्त रूप से अनन्या रतूड़ी को अपना प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में इन प्रमुख छात्र संगठनों के बीच कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।

प्रिंटेड सामग्री, पोस्टर और बैनर पर सख्ती

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की बात कही है। डीयू के प्राक्टर प्रो. मनोज सिंह ने कहा कि परिसर में कहीं भी प्रिंटेड सामग्री, पोस्टर या बैनर पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की सख्ती के बीच छात्र संगठन अब प्रचार के लिए निर्धारित नियमों का पालन करते हुए छात्रों तक पहुंचने की तैयारी में हैं।

कांग्रेस ने NSUI की जीत का किया दावा

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने डूसू चुनाव में NSUI पैनल की जीत का दावा किया है। आदर्श नगर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से शुक्रवार को NSUI पैनल के समर्थन में बैठक आयोजित की गई। देवेंद्र यादव ने कहा कि NSUI के उम्मीदवार जीत के बाद छात्रों के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाएंगे। साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना NSUI की प्राथमिकता होगी।

काम और प्राथमिकताओं के साथ छात्रों के बीच जाएगी ABVP

वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सोलंकी ने प्रत्याशियों की घोषणा के साथ संगठन की प्राथमिकताएं भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष विद्यार्थियों ने ABVP को डूसू में जिम्मेदारी दी थी। पूरे वर्ष छात्र हित से जुड़े मुद्दों को उठाने और उनके समाधान के लिए काम किया गया। उन्होंने कहा कि ABVP इस बार भी अपने काम और आगामी प्राथमिकताओं के साथ विद्यार्थियों के बीच जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा और छात्र सुविधाओं को बेहतर करना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही खासकर छात्राओं के लिए सुरक्षित परिसर सुनिश्चित करना भी प्रमुख मुद्दा रहेगा।

पोस्टर-बैनर पर कार्रवाई की चेतावनी

चुनाव के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की बात कही है। डीयू के प्राक्टर प्रो. मनोज सिंह ने कहा कि परिसर में कहीं भी प्रिंटेड सामग्री, पोस्टर या बैनर पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इस बार अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास, NSUI के विजय शंकर मीणा और AISA-SFI की संयुक्त प्रत्याशी अनन्या रतूड़ी के बीच मुकाबले पर खास नजर रहेगी। तीनों प्रमुख धड़ों के मैदान में उतरने से डूसू चुनाव में मुकाबला कड़ा होने के आसार हैं। लेफ्ट संगठनों ने AISA और SFI के संयुक्त पैनल की घोषणा करते हुए चुनाव में जीत का दावा किया है। संगठनों का कहना है कि जंतर-मंतर से लेकर सत्य निकेतन तक बदलाव की एक लहर साफ दिखाई दे रही है और छात्र इस बार बदलाव के पक्ष में मतदान करेंगे।

चार प्रमुख पदों पर प्रत्याशी

पद      ABVP  NSUI   AISA-SFI

अध्यक्ष  यश डबास       विजय शंकर मीणा       अनन्या रतूड़ी

उपाध्यक्ष          ईशु मौर्य          वीर चतरथ       अक्षत शिखर

सचिव   रिया छाबड़ी     नम्रता चौधरी    स्टेनजिन डेस्कयोंग

संयुक्त सचिव    लक्ष्य राज सिंह  गोपाल चौधरी   बी. पारिजात

डूसू चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए कुल सात उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर पांच, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए चार-चार प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। मतदान 18 सितंबर को होगा और 19 सितंबर को मतगणना की जाएगी।

यश डबास: अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी

यश डबास (ABVP) दिल्ली के कंझावला के रहने वाले हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की है। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी हैं और स्पेन, ऑस्ट्रेलिया तथा सर्बिया में आईटीएफ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल वे दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग में अध्ययनरत हैं।

विजय शंकर मीणा: छात्र अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय

विजय शंकर मीणा (NSUI) मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की है। वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय से बुद्धिस्ट स्टडीज में एमए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। वे छात्रों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

अनन्या रतूड़ी: छात्र आंदोलनों में सक्रिय

अनन्या रतूड़ी (AISA-SFI) मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं और पीजी डीएवी कॉलेज की छात्रा हैं। उन्होंने आईपीसीडब्ल्यू में यौन उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हाईपर-मस्कुलिन और ताकत आधारित राजनीति को लेकर सवाल उठाती रही हैं। AISA की सदस्य अनन्या को AISA और SFI ने संयुक्त रूप से अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है।

तीन प्रमुख धड़ों में मुकाबला

इस बार डूसू चुनाव में ABVP, NSUI और AISA-SFI के बीच मुकाबला खासा दिलचस्प होने के आसार हैं। ABVP जहां अपने पिछले कार्यों और आगामी प्राथमिकताओं के साथ छात्रों के बीच जाने की बात कह रहा है, वहीं NSUI छात्रों के अधिकारों और बेहतर शैक्षणिक माहौल को प्रमुख मुद्दा बना रहा है। दूसरी ओर, AISA-SFI ने बदलाव की राजनीति और छात्र आंदोलनों को अपना आधार बनाया है।

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