अभय मिश्रा, मऊगंज। विंध्य के जंगलों से निकलकर आबादी की दहलीज तक पहुंचे दो हाथियों ने प्रशासन की नींद उड़ा रखी है। ये सिर्फ हाथियों का एक जोड़ा भर नहीं है, बल्कि इनमें से एक हाथी का अतीत बेहद खौफनाक रहा है। दो साल पहले जयसिंहनगर में तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाला वही रेडियो कॉलर हाथी अब मऊगंज और हनुमना के रास्तों पर चहलकदमी कर रहा है।
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की शांत वादियों से निकलकर, मऊगंज की पथरीली राहों तक, पिछले 15 दिनों से यह हाथियों का जोड़ा वन विभाग के लिए चुनौती और ग्रामीणों के लिए कौतूहल बना हुआ है। हर दिन 20 से 25 किलोमीटर की रफ्तार से सफर तय करते हुए ये गजराज अब हनुमना से वापस मऊगंज और चुरहट की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इस कहानी में एक बड़ा मोड़ है।
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जानकारों और वन विभाग के सूत्रों की मानें तो इस जोड़े में मौजूद नर हाथी वही है, जिसने दो साल पहले शहडोल के जयसिंहनगर में भारी तबाही मचाई थी। उस वक्त इस हाथी ने तीन लोगों की जान ले ली थी, जिसके बाद इसे बाकायदा रेस्क्यू कर, रेडियो कॉलर पहनाकर वापस जंगल छोड़ा गया था। आज वही रेडियो कॉलर इसकी पहचान की सबसे बड़ी कड़ी बना हुआ है।
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प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। जैसे ही हाथियों का यह जोड़ा किसी गांव के करीब पहुंचता है, वहां की बिजली काट दी जाती है। वन विभाग का अमला पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहा है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि हाथियों को पत्थर न मारें, उन्हें परेशान न करें। उद्देश्य साफ है, न इंसान को चोट पहुंचे और न ही इन बेजुबानों को कोई खतरा हो।

