अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पत्र पर राम मंदिर ट्रस्ट ने वित्तीय ब्योरा देने से इनकार कर दिया है. चंपत राय ने इसके लिए SIT जांच का हवाला दिया है. जिसकी आड़ में उन्होंने पीएमओ तक से जानकारी साझा करना उचित नहीं समझा. इतना ही नहीं उन्होंने पीएमओ से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया है.
बताया जा रहा है कि स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने PMO को पत्र लिखकर ट्रस्ट की शुरुआत से अब तक के आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति का पूरा ब्योरा सार्वजनिक कराने की मांग की थी. जिसके बाद PMO ने पत्र जिला प्रशासन को संदर्भित किया. जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगी, लेकिन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने SIT जांच का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया है.
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बता दें प्रकरण को लेकर एसआईटी जांच हो चुकी है. इसके इतर लोग लगातार इस मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहे हैं. बीते 21 जून को मामले को लेकर उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने के अनुरोध वाली एक नई जनहित याचिका (पीआईएल) शनिवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल की गई थी. अधिवक्ता मोतीलाल यादव की पीआईएल में राज्य सरकार समेत पुलिस महानिदेशक, अयोध्याडीएम, एसएसपी, ट्रस्ट सचिव को पक्षकार बनाया गया है.
गौरतलब है कि चढ़ावे में गबन को लेकर लगातार नई नई बातें सामने आ रही है. बीते 13 जून को ही इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड ने 60 किलो चांदी गायब होने की बात कही थी. अनुराग रस्तोगी के मुताबिक देशभर के सराफा व्यापारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी इकट्ठा की थी. इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र लिखा गया था. रस्तोगी के मुताबिक, 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद ये चांदी की ईंटें अयोध्या स्थित रामकचहरी में सौंपी गई थीं.

