हेमंत शर्मा, इंदौर। कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां बड़ी संख्या में पहुंचे लोग समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन ज्यादातर को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। कई शिकायतकर्ता ऐसे हैं जो महीनों नहीं, बल्कि सालों से जनसुनवाई में आ रहे हैं, फिर भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

लोगों का साफ कहना “समाधान नहीं हो रहा”

जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने बताया कि वे लगातार आवेदन दे रहे हैं, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। अधिकारी सिर्फ दूसरे कमरे में भेज देते हैं या अगली तारीख दे देते हैं।

घर बचाने की गुहार लेकर पहुंचे बुजुर्ग

सोमवती सिसोदिया के मामले में सास-ससुर जनसुनवाई में पहुंचे। उनका आरोप है कि बहू मकान पर कब्जा करना चाहती है और पोता उनके साथ मारपीट करता है। वे दूसरी बार जनसुनवाई में आए, पहले उन्हें अलग-अलग कमरों में भेजा गया लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।

12 साल से प्लॉट नहीं, सिर्फ आश्वासन

एक बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने 12 साल पहले वात्सल्य ग्रुप में प्लॉट खरीदा था, लेकिन आज तक रजिस्ट्री नहीं हुई। कलेक्टर के लिखित आदेश और शिविर लगने के बाद भी समस्या जस की तस है। वे 5 बार जनसुनवाई में आ चुके हैं।

राजनीतिक रंजिश के आरोप, दुकान तोड़ने की धमकी

2002 से स्क्रैप का काम कर रहे एक व्यापारी ने आरोप लगाया कि पार्षद रुबीना इकबाल खान चुनावी रंजिश के चलते उन्हें परेशान कर रही हैं। सभी लाइसेंस होने के बावजूद दुकान को अवैध बताकर तोड़ने का नोटिस दिया गया।

बिजली बिल विवाद: 14 हजार से 75 हजार कैसे?

एक युवक 2023 से बिजली बिल के लिए चक्कर लगा रहा है। मीटर जब्त होने के बाद बिल 14 हजार से बढ़कर 75 हजार हो गया। कई बार भुगतान करने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। घर 2 साल से सील है, फिर भी राहत नहीं।

मंडी में भुगतान लेट, ब्याज नहीं मिला

एक किसान ने बताया कि लहसुन बेचने के बाद भुगतान देर से मिला, लेकिन ब्याज अब तक नहीं दिया गया। 15 बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, अपर कलेक्टर से भी मिल चुके हैं—फिर भी निराकरण नहीं।

सीएम हेल्पलाइन पर की थी शिकायत OTP लेकर उसे कर दिया क्लोज

एक विधवा महिला ने आरोप लगाया कि उसकी शिकायत को ओटीपी लेकर बंद कर दिया गया। 2 साल से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रही है, लेकिन समाधान नहीं मिला। पैसे की कमी के कारण कोर्ट भी नहीं जा सकती। छात्रवृत्ति और प्लॉट विवाद भी लंबित है। एक पिता बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए 1 महीने से चक्कर लगा रहा है। दो महिलाएं 2016 से प्लॉट के लिए शिकायत कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जनसुनवाई पर उठ रहे बड़े सवाल

जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिख रही है। लोग उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन निराश होकर लौटते हैं। अब सवाल ये है क्या जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?या फिर प्रशासन इस सिस्टम में सुधार कर लोगों को वास्तविक राहत देगा?

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