नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त से 8 सितंबर) के दौरान सूरत से नेत्रदान को लेकर बेहद सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। पिछले तीन वर्षों में सूरत में 1,679 लोगों ने नेत्रदान किया है। वहीं, पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों की बात करें तो कुल 2.37 लाख लोग जीते जी अपनी आंखें दान करने का फॉर्म (प्लेज़ फॉर्म) भर चुके हैं। लोक दृष्टि आई बैंक के अनुसार, हर साल लगभग 21 हजार लोग नेत्रदान का संकल्प ले रहे हैं।

25 साल पहले जब जागरूकता अभियान शुरू हुआ था, तब लोगों के मन में यह अंधविश्वास था कि नेत्रदान करने से अगले जन्म में अंधे पैदा होंगे। हालांकि, समय के साथ जागरूकता बढ़ी और यह मिथक दूर हुआ।

तीन वर्षों के नेत्रदान आंकड़े:

  • 2024-25: 741 नेत्रदान हुए, जिनमें से 322 ट्रांसप्लांट हुए और 415 कॉर्निया सामान्य ट्रांसप्लांट में उपयोग नहीं हो पाए।
  • 2025-26: 688 नेत्रदान में से 281 का उपयोग हुआ और 410 कॉर्निया ट्रांसप्लांट में उपयोग नहीं हो सके।
  • 2026-27 (अगस्त 2026 तक): 250 नेत्रदान हुए, 123 ट्रांसप्लांट में प्रयुक्त हुए और 121 का उपयोग नहीं हुआ।

नोट: आई बैंक के अनुसार, जो कॉर्निया सामान्य ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं होते, वे शोध व अन्य चिकित्सीय कार्यों में काम आते हैं और पूरी तरह बेकार नहीं जाते।

मृत्यु के बाद नेत्रदान प्रक्रिया:

  1. मृत्यु के तुरंत बाद आई बैंक को सूचित करें।
  2. 6 से 8 घंटे की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें।
  3. परिवार को अपने संकल्प की जानकारी पहले से देकर रखें।
  4. मृतक की बीमारी और मेडिकल हिस्ट्री टीम के साथ साझा करें।
  5. संकल्प पत्र न भरने पर भी परिजन मृत्यु के बाद सहमति देकर प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं।

किन स्थितियों में नेत्रदान संभव नहीं?

लोक दृष्टि आई बैंक के चेयरमैन डॉ. प्रफुल्ल शिरोया के मुताबिक, उम्र या चश्मा नेत्रदान में बाधा नहीं है। लेकिन यदि व्यक्ति HIV/AIDS, हेपेटाइटिस, सेप्टिसीमिया, गैंग्रीन या कुछ विशेष कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो, तो नेत्रदान स्वीकार नहीं किया जाता। अंतिम निर्णय मेडिकल जांच के बाद ही होता है।

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