चेतन योगी, देवास। मध्य प्रदेश के देवास के ग्राम बालोन में पशु प्रेम और इंसान व बेजुबान के रिश्ते की ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। वर्षों तक किसान परिवार के साथ खेतों में पसीना बहाने वाले उनके बैल के निधन पर परिवार ने उसे महज एक पशु नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह अंतिम विदाई दी।
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बैल के निधन के बाद परिवार ने वैदिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। वर्षों तक खेतों में किसान का साथ निभाने वाले इस बेजुबान साथी की याद में परिवार ने नुक्ता कार्यक्रम यानि मृत्युभोज भी आयोजित किया, जिसमें ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया। कभी इसी बैल के साथ खेतों में किसान की सुबह होती थी और मेहनत की शाम ढलती थी। खेती के कठिन दौर में वह परिवार का भरोसेमंद साथी बना रहा। समय बदला, खेती के तौर-तरीके बदले, लेकिन परिवार के साथ उसका रिश्ता कभी नहीं बदला। उसके जाने के बाद परिवार ने जिस तरह सम्मान और संवेदना के साथ अंतिम विदाई दी, उससे हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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ग्रामीणों का कहना है कि बैल सदियों से किसान और खेती का अभिन्न हिस्सा रहा है। वह केवल खेत जोतने वाला पशु नहीं, बल्कि किसान की मेहनत, संघर्ष और जीवन का साथी रहा है। बालोन में परिवार द्वारा निभाई गई यह परंपरा इंसान और बेजुबान जीव के बीच के उस भावनात्मक रिश्ते को सामने लाती है, जिसमें कृतज्ञता के लिए शब्द नहीं, बल्कि भावनाएं काफी होती हैं।बैल की अंतिम विदाई और उसकी स्मृति में आयोजित नुक्ता कार्यक्रम गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह प्रसंग संदेश देता है कि जो बेजुबान जीवनभर हमारा साथ निभाते हैं, उनके प्रति सम्मान और संवेदना भी हमारी जिम्मेदारी है।
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