काजल, हिसार। जिले के बालसमंद में सोमवार को भाखड़ा कमांड एरिया के किसानों ने नहरी पानी में लगातार हो रही कटौती के विरोध में तहसील कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन में क्षेत्र के दर्जनों गांवों से आए किसानों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। किसानों ने सरकार पर अपने अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिला, तो पूरे प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

पानी की कमी से टेल क्षेत्र के किसान बेहाल

प्रदर्शन की संयुक्त अध्यक्षता सूबेदार हरिसिंह, सुल्तान रावलवास और ओम गढ़वाल ने की। ज्ञापन में बताया गया कि खनौरी हेड से बरवाला ब्रांच की स्वीकृत क्षमता 1725 क्यूसेक है, लेकिन वर्षों से मात्र 1500 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है। इसका सबसे बुरा असर बरवाला ब्रांच के अंतिम छोर (टेल क्षेत्र) के किसानों पर पड़ रहा है। हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन पानी के अभाव में सूखी पड़ी है, जिससे फसल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

20 वर्षों से नहरें सूखी, ट्यूबवेल पर निर्भरता

किसानों का कहना है कि बालसमंद क्षेत्र की अधिकांश नहरें पिछले 20 वर्षों से बदहाल हैं। पानी न मिलने के कारण किसान महंगे ट्यूबवेल चलाने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। क्षेत्र में भूजल खारा होने के कारण वह सिंचाई के लिए भी उपयुक्त नहीं है। इसके साथ ही, कई गांवों में गंभीर पेयजल संकट भी पैदा हो गया है।

अन्य योजनाओं से पहले कमांड एरिया की सुध ले सरकार

प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ किया कि जब तक भाखड़ा कमांड एरिया के किसानों को उनका स्वीकृत पानी नहीं मिल जाता, तब तक भाखड़ा प्रणाली से अन्य क्षेत्रों को पानी देने की योजनाएं पूरी तरह अनुचित हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले अपने पुराने दायित्वों को पूरा करे और किसानों के जल अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्थायी नीति बनाए।

आंदोलन को दी तेज करने की चेतावनी

कुरड़ाराम नंबरदार, संदीप धीरणवास और रमेश बेनीवाल समेत अन्य किसान नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला, मंडल और राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। इसके तहत महापंचायतें और चंडीगढ़ कूच जैसे कदम उठाए जाएंगे। इस दौरान प्रदर्शन में अनिल लौरा, रेणु चहल, बबलू गोरछी समेत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।