Lalluram Desk. FCRA संशोधन बिल 2026: संसद के मॉनसून सत्र में आज भी केंद्र के ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026’ को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों का विरोध जारी रहा। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस हफ़्ते संसद में इस बिल पर चर्चा होगी। इस बिल का मकसद ‘विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010’ में संशोधन करके विदेशी योगदान के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

खबरों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन उन मामलों में विदेशी फंडिंग वाली संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण और मज़बूत करेगा, जिनमें संगठनों का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पार्टी ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल’ का विरोध करेगी। उन्होंने कहा, “हम FCRA से जुड़े इस कदम का विरोध करेंगे। फ्लोर लीडर्स की बैठक के बाद हम (रणनीति के बारे में) कोई फ़ैसला लेंगे।” केवल कांग्रेस ही नहीं कई विपक्षी दलों ने भी FCRA संशोधन बिल का विरोध किया है।

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी इस बिल का ज़ोरदार विरोध करेगी और ज़ोर देकर कहा था कि “सरकार इस तरह के बिल को ज़बरदस्ती पास नहीं करा सकती।”

उन्होंने FCRA बिल को ‘पूरी तरह से असंवैधानिक’ बताया और चिंता जताई कि प्रस्तावित कानून NGO और सामुदायिक समूहों, खासकर अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे समूहों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठनों, खासकर केरल में ईसाई समूहों को डराने और उन पर नियंत्रण करने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने कहा कि यह बिल स्वैच्छिक और समाज सेवा करने वाले संगठनों पर शिकंजा कसेगा।

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने शनिवार को केंद्र सरकार से FCRA संशोधन बिल वापस लेने और ‘विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010’ की धारा 15 को रद्द करने की अपील की।

NCP (SP) ने भी बिल का विरोध किया है। NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग को हमेशा शक की नज़र से नहीं देखा जाना चाहिए। सुले ने बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की।

उन्होंने आगे कहा, “अगर सरकार बिल वापस लेने को तैयार नहीं है, तो उसे इसे JPC (संयुक्त संसदीय समिति) के पास भेजना चाहिए।” इस हफ़्ते FCRA बिल पेश किए जाने की संभावना के बीच, कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा और लोकसभा में अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। इसमें उन्हें 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अपनी मौजूदगी पक्की करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने INDIA ब्लॉक के सभी सहयोगियों से भी कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके सांसद इन तीन दिनों में मौजूद रहें।

FCRA बिल 2026 क्या है?

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 का मकसद Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव करना है। यह कानून व्यक्तियों, संघों और संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे को रेगुलेट करता है।

जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 एक्टिव FCRA रजिस्ट्रेशन थे, जबकि 22,498 रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए गए थे, और 15,212 की समय-सीमा खत्म हो गई थी।

FCRA बिल में एक ‘डेज़िग्नेटेड अथॉरिटी’ (अधिकृत प्राधिकरण) बनाने का प्रस्ताव है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, सरेंडर कर दिया जाता है या खत्म हो जाता है, तो यह अथॉरिटी विदेशी चंदे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेगी।

ऐसे विदेशी फंड से बनी संपत्ति शुरू में ‘डेज़िग्नेटेड अथॉरिटी’ के कंट्रोल में रखी जाएगी। अगर संस्था तय समय के अंदर अपना रजिस्ट्रेशन दोबारा हासिल नहीं कर पाती है, तो इन संपत्तियों को पूरी तरह से ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके अलावा, अथॉरिटी के पास इन संपत्तियों को मैनेज करने और ज़रूरत पड़ने पर संस्थाओं की गतिविधियों पर नज़र रखने का अधिकार होगा।

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