Odisha Desk, पुरी: शृंगार प्रिय भगवान श्री जगन्नाथ के कुल 24 प्रमुख वेशों में से 22 वेश श्रीमंदिर में आयोजित किए जाते हैं। इनमें से ‘सुनाबेश’ (स्वर्ण शृंगार) सबसे अलौकिक और दुर्लभ माना जाता है। वर्ष भर में महाप्रभु कुल 6 बार सुनाबेश में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिनमें से 5 बार श्रीमंदिर की रत्नावेदी पर और 1 बार रथयात्रा के दौरान आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर रथों पर यह वेश आयोजित होता है।
रत्नावेदी पर 5 सुनाबेश
श्रीमंदिर की रत्नावेदी पर चार प्रमुख पूर्णिमा तिथियों; कुमार पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा और दोल पूर्णिमा के साथ-साथ विजया दशमी के दिन महाप्रभु का सुनाबेश किया जाता है।
श्री जगन्नाथ संस्कृति शोधकर्ता असित मोहंती के आलेख के अनुसार:
राजराजेश्वर वेश: कार्तिक पूर्णिमा के दिन होने वाले सुनाबेश को ‘राजराजेश्वर वेश’ कहा जाता है। इस दिन महाप्रभु द्वारकाधीश श्रीकृष्ण के रूप में अपने ऐश्वर्य भाव को प्रकट करते हैं।
राजवेश: अन्य चार तिथियों (कुमार पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा, दोल पूर्णिमा और विजया दशमी) पर होने वाले सुनाबेश को ‘राजवेश’ कहा जाता है।
रथ पर आयोजित सुनाबेश
आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन रथयात्रा के समापन चरण में सिंहद्वार के सामने खड़े रथों पर आयोजित होने वाले सुनाबेश को ‘बड़तढ़ाउ वेश’ (Bada Tadhau Besha) के नाम से जाना जाता है। रथों पर महाप्रभु के इस दिव्य स्वर्ण शृंगार के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।
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