होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ब्रिटिश सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की 2 गनबोट्स ने उस टैंकर पर गोलीबारी की, जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। हालांकि, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि टैंकर और उसमें सवार चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं। जहाज की पहचान और उसका गंतव्य सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस घटना से पहले ईरान ने घोषणा की थी कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार जिन दो जहाजों पर फायरिंग हुई उनमें से एक भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर भी शामिल था। यह जानकारी कई समुद्री और सुरक्षा सूत्रों ने दी है, जिसे शिपिंग मॉनिटर टैंकर ट्रैकर्स ने रिपोर्ट किया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जहाज लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था। ब्रिटेन के समुद्री निगरानी केंद्र मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन सेंटर के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गनबोट्स टैंकर्स के पास आईं और बिना रेडियो चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी।
इसके बाद दोनों जहाज स्ट्रेट पार किए बिना ही लौट गए। हालांकि जहाज और उसके क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। इस घटना के बाद भारत ने सख्त रुख दिखाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को भारत में तैनात ईरान के राजदूत को तलब किया और इस घटना पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। इससे पहले ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था। ईरान का आरोप था कि अमेरिका सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है इसलिए 24 घंटे के भीतर उसने फैसला बदल लिया।
अमेरिका के प्रतिबंधों के जवाब में उठाया कदम
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में आवाजाही रोकने का ईरान का कदम अमेरिका द्वारा ईरानी शिपिंग और बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। ईरान ने 7 सप्ताह से चल रहे संघर्ष के दौरान अधिकतर जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई हुई है और केवल उन्हीं जहाजों को अनुमति दी है जिन्हें वह अधिकृत करता है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण अब पहले की तरह सख्त सैन्य निगरानी में है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक अमेरिका का प्रतिबंध जारी रहेगा, तब तक इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही रोकी जाएगी।
‘अब ईरान की इजाजत से ही गुजर पाएंगे जहाज’
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि स्थिति ‘पहले जैसी व्यवस्था’ में लौट रही है, जिसमें जहाजों को ईरानी नौसेना की इजाजत और टोल देकर ही गुजरने दिया जाएगा। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक दिन पहले दावा किया था कि जलडमरूमध्य खुला रहेगा। यह बयान उस समय आया था जब लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा हुई थी।
‘अमेरिकी प्रतिबंध समझौता होने तक जारी रहेंगे’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में संकेत दिया था कि होर्मुज की नाकेबंदी को खोलने पर विचार हो सकता है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जब तक समझौता नहीं होता, अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह जारी रहेंगे, चाहे ईरान कुछ भी करे। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस वजह से यहां की स्थिति पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
’21 जहाजों को वापस ईरान की ओर भेजा गया’
डेटा फर्म Kpler के मुताबिक, इस समय इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही केवल उन्हीं रास्तों तक सीमित है, जिन्हें ईरान ने मंजूरी दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि सोमवार से अब तक 21 जहाजों को वापस ईरान की ओर भेजा गया है। लगातार बदलते हालात और ईरान-अमेरिका तनाव ने इस क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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