बरेली में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. UFBU के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण के तहत कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से लंबित मांग पर जल्द फैसला लेने की अपील की.

बरेली. पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बरेली में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने बुधवार को प्रदर्शन किया. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स यानी UFBU के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण के तहत कर्मचारी कार्य समाप्ति के बाद पीलीभीत बाईपास रोड स्थित केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर जुटे.

शाम करीब 5:30 बजे बड़ी संख्या में बैंककर्मियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और केंद्र सरकार से लंबे समय से लंबित पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की.

दो साल से लंबित मांग

प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि कर्मचारी अभी सप्ताह में छह दिन सेवाएं दे रहे हैं. उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना जरूरी हो गया है.

UFBU बरेली के जिला संयोजक नवींद्र कुमार ने कहा कि यह मांग दो वर्षों से अधिक समय से लंबित है. उन्होंने बताया कि बैंकिंग संगठनों और प्रबंधन स्तर पर इस विषय में सहमति और अनुमोदन हो चुका है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है.

कार्य-जीवन संतुलन पर जोर

पंजाब नेशनल बैंक के नेता चरण सिंह यादव ने कहा कि बढ़ते काम और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद बैंक कर्मचारी पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनके अनुसार पांच दिवसीय व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और कार्यक्षमता तथा उत्पादकता में भी सुधार हो सकता है.

UFBU अध्यक्ष पीके माहेश्वरी ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को कर्मचारियों के साथ बैंकिंग व्यवस्था के हित में भी आवश्यक बताया. उपाध्यक्ष संतोष तिवारी ने कर्मचारियों से आंदोलन में एकजुट होकर भाग लेने का आह्वान किया.

यह भी पढ़ें: अहिल्याबाई होल्कर पुण्यतिथि: आज प्रदेशभर में बीजेपी का कार्यक्रम; श्रद्धांजलि के बहाने सपा को घेरने की तैयारी, पढ़ें पूरा मास्टरप्लान

महिला कर्मचारियों का मुद्दा

महिला प्रकोष्ठ की संयोजक रश्मि शर्मा ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से महिला कर्मचारियों को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा.

संजीव मेहरोत्रा, सुनील कुमार मित्तल और अधिकारी संघ के सुनीत भटनागर ने कहा कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा.

प्रदर्शन में विभिन्न सरकारी बैंकों के कर्मचारी, अधिकारी और संगठन के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए.