जाजपुर: ओडिशा के जाजपुर जिले से बाढ़ राहत सामग्री वितरण और आपदा प्रबंधन की एक बेहद हैरान और परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। दशरथपुर ब्लॉक में बाढ़ की भयावह विभीषिका झेल रहे पीड़ितों को प्रशासन की ओर से प्रति परिवार रोजाना महज 1 लीटर पीने का पानी दिया जा रहा है। बाढ़ के बीच पीने के पानी के लिए तरस रहे ग्रामीणों का कहना है कि यह मदद राहत कम और उनके संकट का क्रूर मज़ाक ज्यादा लगती है।

आमतौर पर एक सामान्य परिवार में कम से कम 4 से 5 सदस्य होते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो 5 लोगों के बीच 24 घंटे में सिर्फ 1 लीटर पानी बांटा जा रहा है। भीषण गर्मी और बाढ़ के गंदे पानी के बीच घिरे इन लोगों के लिए रोजाना पर्याप्त साफ पानी पाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन संकट के इस समय में व्यवस्थाएं संभालने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ है।

दशरथपुर ब्लॉक में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। क्षेत्र के कुल 35 में से 19 पंचायतें बाढ़ के पानी की चपेट में हैं। कई गांवों के मुख्य रास्तों और घरों के आंगन में अभी भी 3 फीट तक बाढ़ का पानी तैर रहा है। आवागमन पूरी तरह से ठप हो चुका है, जिससे लोग अपने घरों की छतों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए ब्लॉक प्रशासन की ओर से प्रभावितों को पका हुआ भोजन तो उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन पीने के पानी का संकट विकराल रूप ले चुका है।

जल आपूर्ति के इस गंभीर संकट पर ब्लॉक पेयजल विभाग की कनिष्ठ अभियंता (JE) स्वर्णलता राउत ने विभागीय पक्ष रखा है। उनके अनुसार:

ब्लॉक प्रशासन की ओर से अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में 1 लाख से अधिक पीने के पानी की बोतलें बांटी जा चुकी हैं। पानी की कमी दूर करने के लिए कुछ चुनिंदा स्थानों पर पानी के टैंकर भेजे गए हैं और एक वाटर पाउच पैकेजिंग मशीन भी लगाई गई है।

हालांकि, जमीनी हकीकत विभाग के इन दावों से काफी अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजी आंकड़े चाहे जो भी कहें, लेकिन हकीकत में हर परिवार की प्यास बुझाने के लिए 1 लीटर की बोतल पूरी तरह नाकाफी है। स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत पर्याप्त मात्रा में पेयजल पाउच और टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए।